Man ki Baat में डिस्लाइक का रिकॉर्ड बनने पर अखिलेश बोले- पलटे हुए अंगूठे, सत्ता भी पलट देते हैं
नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच होने जा रही जेईई और नीट परीक्षाओं को लेकर सरकार का जबरदस्त विरोध हो रहा है। परीक्षा के विरोध में सोमवार को समाजवादी पार्टी छात्र सभा के सदस्यों ने लखनऊ में राजभवन के पास प्रदर्शन किया। इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रेसीडेंट अखिलेश यादव ने पीएम मोदी की मन की बात कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर मिले डिस्लाइक को लेकर कहा कि, पलटे हुए अंगूठे, सत्ता भी पलट देते हैं।
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शायराना अंदाज में बीजेपी पर अखिलेश का तंज
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को शायराना अंदाज में ट्वीट कर लिखा,"कभी-कभी यूं भी रखी जाती है 'इंसाफ' की आबरू.. हिफाजत में रख लिये जाएं कुछ फैसलों के फैसले" वहीं अपने दूसरे ट्वीट ने अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है, जिस प्रकार देशभर के परीक्षार्थियों ने अपनी 'नापसंदगी' दर्शाकर अपना रोष दर्ज किया है, उसने साफ कर दिया है कि चिंतित युवा और अभिभावक भी चाहते हैं कि सत्ताधारी अपना दंभ त्यागकर परिवारवालों की मांग सुनें। याद रहे पलटे हुए अंगूठे सत्ता भी पलट देते हैं। ये जनतंत्र है; मनतंत्र नहीं।

अखिलेश की BJP को नसीहत- दंभ त्याग दें
इससे पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगे लिखा है कि भाजपा की तरफ से ये हास्यास्पद और तर्कहीन बात फैलाई जा रही हैं कि जब लोग दूसरे कामों के लिए घर से निकल रहे हैं, तो परीक्षा क्यों नहीं दे सकते। भाजपाई सत्ता के मद में ये भी भूल गए कि लोग मजबूरी में निकल रहे हैं और जो लोग घर पर रहकर बचाव करना भी चाहते हैं, आपकी सरकार परीक्षा के नाम पर उन्हें भी बाहर निकलने पर बाध्य कर रही है। ऐसे में अगर किसी परीक्षार्थी, उनके संग आए अभिभावक या घर लौटने के बाद उनके संपर्क में आए घर के बुजुर्गों को संक्रमण हो गया तो इसकी कीमत क्या ये सरकार चुकाएगी?

लाठीचार्ज नहीं 'खूनी हमला' हमला: अखिलेश
सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि ये लाठीचार्ज नहीं 'खूनी हमला' हमला है। अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, 'कोरोनाकाल में परीक्षा कराने के विरोध में सड़कों पर उतरे सपा के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज नहीं 'ख़ूनी हमला' हुआ है। आज बाल-बच्चों वाला हर परिवार चिंतित है। सबका साथ का दावा करनेवाले अकेले लोगों की मनमानी कब तक चलेगी।'












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