पीएम से हाथ मिलाना अखिलेश की मजबूरी
वाराणसी। सियासत कभी मजबूरी तो कभी मजबूती दोनो ही सिखाती है। उत्तर प्रदेश की सियासत इसी का जीता जागता उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से दो दिन के बनारस के दौरे पर हैं। ऐसे में राज्य का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रधानमंत्री की आगवानी करनी पड़ रही है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि ठीक एक ही दिन पहले उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने मोदी के खिलाफ जनता दल के पुराने सहयोगियों के साथ ताल ठोकी थी।

उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहे अखिलेश यादव के लिए राज्य के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के लिए उन्हें केंद्र सरकार के साथ सामंजस्य बनाना एक बड़ी चुनौती है। वो भी ऐसे वक्त में जब उनके पिता जनता दल के पुराने सहयोगी नीतिश कुमार, लालू प्रसाद यादव, एचडी देवेगौड़ा के साथ एक नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहे है।
उत्तर प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराध की वजह से उत्तर प्रदेश की छवि काफी धूमिल हुई है। वहीं आंकड़ो पर नजर डालें तो प्रदेश में सपा की सरकार आने के बाद रेप, दंगों और अपराध की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। जिसके चलते अखिलेश यादव को काफी आलोचनाओ का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐेसे न चाहते हुए भी अखिलेश यादव को राज्य के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवभगत करनी पड़ रही है।
लोकसभा चुनावों में अपना जनाधार पूरी तरह से खो चुकी समाजवादी पार्टी के लिए 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में खुद की जमीन को बनाये रखना सबसे बड़ी चुनौती है। अखिलेश के पास नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से निपटने का हाल-फिलहाल कोई पुख्ता रणनीति नहीं दिखती। ऐसे में उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव का समय आने तक सपा मोदी की लोकप्रियता के कम होने का इंतजार नहीं कर सकती है।












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