अजीत जोगी: इंजीनियर से सीएम तक, राजीव गांधी के एक फोन कॉल ने बदल दी थी जिंदगी
अजीत जोगी: राजीव गांधी के फोन कॉल के बाद बने थे सांसद, फिर छत्तीसगढ़ के पहले सीएम
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी का शुक्रवार को निधन हो गया है। बीते कई दिनों से वो अस्पताल में भर्ती थे। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली है। छत्तीसगढ़ राज्य के पहले सीएम अजीत जोगी 17 दिनों से कोमा में थे। 9 मई को अजीत जोगी जब अपने लॉन में व्हीलचेयर के पर टहल रहे थे। तो उनको कार्डियक अरेस्ट हुआ था, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। कभी स्कूल पैदल जाने वाले अजीत जोगी ने पहले इंजीनियरिंग में टॉप किया फिर आईपीएस, आईएएस बने और सीएम तक का सफर किया।
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इंजीनरिंग के बाद IAS, फिर राजनीति में आए अजीत जोगी
अजीत जोगी पहले मध्य प्रदेश और फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़े चेहरा रहे। अजीत जोगी की जिंदगी फिल्मों की सी रही। इंजीनियरिंग करने के बाद अजीत जोगी पहले आईपीएस और फिर आईएएस बनें। राजीव गांधी जब 1984 में पीएम थे तो कई बार उनकी मुलाकात हुई। राजीव को वो जंच गए और यहीं से उनका राजनीति में जाना तय हुआ।

अचानक आया था राजीव गांधी के पीए का फोन
जोगी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि 1985 में वो इंदौर के कलेक्टर थे। एक दिन घर लौटे तो पत्नी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया था। जोगी ने उस समय राजीव गांधी केपीए वी जॉर्ज को फोन किया तो बताया गया कि उन्हें कांग्रेस राज्यसभा भेजना चाहती है और वो कलेक्टर पद से तुरंत इस्तीफा दे दें। कुछ देर में ही जोगी ने फैसला कर लिया कि वो राजनीति में जाएंगे।
रात में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह उन्हें लेने इंदौर आए और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दूसरे ही दिन भोपाल जाकर उन्होंने कांग्रेस से राज्यसभा के नामांकन भर दिया। इस तरह अचानक वो राजनीति में आ गए।

बने छत्तीसगढ़ के पहले सीएम
अजीत जोगी 1986 से 1998 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। इस दौरान वह कांग्रेस में भी अलग-अलग पदों पर रहे। 1998 में रायगढ़ से लोकसभा सांसद चुने गए। साल 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ, तो उस क्षेत्र में कांग्रेस को बहुमत था। कांग्रेस ने अजीत जोगी को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया। जोगी 2003 तक राज्य के सीएम रहे।

16 साल व्हीलचेयर पर रहे
20 अप्रैल, 2004 को अजीत जोगी महासमुद लोकसभा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। प्रचार के दौरान अजित कांग्रेस महासचिव मेहतर लाल साहू के साथ कार से जा रहे थे। गरियाबंद के पास उनकी कार एक पेड़ से टकरा गई। जोगी के पैर को लकवा मार गया। इसके बाद से अजित जोगी व्हील चेयर पर रहे। तबीयत खराब रहने के बावजूद राजनीति में वो जमें रहे। अजीत जोगी ने 2016 में कांग्रेस से बगावत कर अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के नाम से गठन किया था। हालांकि उनकी पार्टी को ज्यादा सफलता नहीं मिली।

विवादों से भी रहा नाता
अजीत जोगी के नाम के साथ कई विवाद जुड़े। इनमें एक विवाद उनके आदिवासी होने को लेकर भी रहा। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2018 में उनके आदिवासी होने के पक्ष में फैसला दिया। अजीत जोगी से एक विवाद उनकी बेटी की कथित खुदकुशी से भी जुड़ा है। घटना 12 मई, 2000 की है। अजीत जोगी इंदौर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के स्वागत में लगे हुए थे, उसी दौरान उनकी बेटे ने इंदौर स्थित उनके घर पर ही जान दे दी। जानकारी के मुताबिक वह जहां शादी करना चाहती थी, जोगी उसके लिए राजी नहीं थे। उसका शव उस समय इंदौर के ही कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेकिन, अजीत जोगी ने बाद में कोशिश की थी कि शव को निकालकर अपने पैतृक गांव ले जाएं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। लेकिन, जब वे छत्तीसगढ़ के सीएम बने तो एक दिन रातों-रात वो उस शव को निकालकर सरकारी विमान से बिलासपुर मंगवा लिया और फिर उसे वहां क्रिश्चियन रीति से दफना दिया। 2003 में अजीत जोगी पर बीजेपी विधायकों को खरीदने की कोशिश के भी आरोप लगे थे, इसका एक स्टिंग ऑपरेशन भी आया था। 2004 में अजीत जोगी के साथ एक भीषण कार ऐक्सिडेंट हुआ था, जिसमें उनकी जान तो बच गई, लेकिन वे हमेशा के लिए लकवाग्रस्त होकर रह गए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया था कि विरोधियों के जादू-टोने की वजह से वह हादसा हुआ था।












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