टीवी डिबेट से हो रहा सबसे ज्यादा प्रदूषण, बात को समझे बिना बस एजेंडा चला रहे: सुप्रीम कोर्ट
टीवी डिबेट कर रहीं सबसे ज्यादा प्रदूषण, बात को समझे बिना बस एजेंडा चला रहे: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 17 नवंबर: राजधानी दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही को जिस तरह से टीवी पर दिखाया जा रहा है, उसको लेकर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि टीवी चैनल हद करते हैं, यहां कहा कुछ जाता है और वो उसका बना कुछ और ही देते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि उनको चीजों की समझ ही नहीं है, वो बस अपने एंजेडे को बढ़ाने में लगे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रदूषण की तमाम वजहें तो हैं ही लेकिन टीवी पर चल रही बहसें सबसे ज्यादा प्रदूषण पैदा कर रही है। वे चीजों को समझते ही नहीं हैं और बयानों को संदर्भ से एकदम बाहर कर रिपोर्ट किया जाता है। हर किसी का अपना एजेंडा है और उसी को बढ़ाने में लगा है।
सुनवाई के तुषार मेहता ने कहा कि मेरे बारे में मीडिया में कहा गया कि मैंने पराली जलाने को लेकर गलत जानकारी दी, मैं इस पर स्पष्टीकरण देना चाहता हूं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि पब्लिक ऑफिस में ऐसी आलोचना होती रहती है, इसे भूल जाइए। चीफ जस्टिस ने कहा कि कितने फीसदी प्रदूषण किससे है, ये आंकड़े महत्वपूर्ण नहीं हैं। इस सबसे मुद्दे को घुमाने की कोशिश ना की जाए। हमें प्रदूषण कम करने की चिंता है।
सीजेआई ने पराली को लेकर दिल्ली सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, अगर आप इसी तरह और बातें उठाते रहेंगे तो मुख्य मुद्दा नहीं सुलझेगा। हम किसानों को दंडित नहीं करना चाहते हैं। हमने पहले ही केंद्र से उन किसानों को आगे बढ़ाने और अनुरोध करने के लिए कहा है कि वे कम से कम एक सप्ताह तक पराली ना जलाएं, देखें तो टीवी पर बहस किसी भी अन्य स्रोत की तुलना में अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है, सबका वहां अपना एजेंडा हैं लेकिन हम यहां समाधान निकालने की कोशिश में हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई (15 नवंबर) को केंद्र और दिल्ली की सरकार को प्रदूषण के मामले में फटकार लगाई थी। दिल्ली सरकार के हलफनामे को देखने के बाद कोर्ट ने कहा था कि आपने हलफनामे में प्रदूषण का सारा दोष पड़ोसी राज्यों के किसानों पर मढ़ दिया है, ये बिल्कुल गलत है। ऐसा लगता है कि आप इससे बचकर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में सरकार पर वायु प्रदूषण से निपटने में गंभीरता नहीं दिखाने की बात कही गई है और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को अदालत की निगरानी में लेने की मांग की गई है। जिस पर सुनवाई हो रही है। सीजेआई एन वी रमना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।












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