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Air Pollution Explainer: क्या AQI 999 पहुंचा तो कोई नहीं बच पाएगा? जानिए स्वास्थ्य के लिहाज से कितना है गंभीर

Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली सहित आसपास एनसीआर इलाका खतरनाक वायु प्रदूषण (Air Pollution) की जद में है। दिल्ली गैस चेंबर बन चुकी है। आलम यह है कि दूषित हवा के बीच दिल्लीवासी मास्क लगाकर घरों से निकलने को मजबूर हैं। इन सब के बीच सबसे डरा देने वाली बात यह भी है कि 18 नवंबर को दिल्ली और एनसीआर में कई जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 999 तक पहुंच गया। जो कि गंभीर वायु प्रदूषण संकट को बतलाता है। ऐसे में क्या होगा अगर एक्यूआई 999 पहुंच गया तो?

दुनिया भर में AQI मीटर 999 से ज्यादा का लेवल नहीं दिखाते, जो इसे बेहद खतरनाक बताता है। 1952 में लंदन का वायु प्रदूषण 500 को पार कर गया था, जिसके कारण तीन दिनों में जहरीली हवा के कारण हजारों लोगों की मौत हो गई थी।

Delhi Air Pollution

1952 में उस वक्त लंदन को ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था, जब प्रदूषण का स्तर 500 से अधिक हो गया था, जिससे हजारों लोगों की मौत हो गई थी और अस्पतालों पर मरीजों का बोझ बढ़ गया था।

क्या होगा अगर AQI 999 हो गया तो...

दरअसल, एक्यूआई 999 का मतलब होता है स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर खतरा। जब AQI 999 पर पहुंच जाता है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए इमरसेंजी का संकेत देता है। स्वस्थ व्यक्तियों को भी सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश और आंखों में जलन का अनुभव हो सकता है। दिल के दौरे, स्ट्रोक और श्वसन संबंधी समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से मौजूद बीमारियों वाले लोगों जैसे कमजोर लोगों को जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

AQI के लेवलों को समझिए

एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI हिंदी में जिसे वायु गुणवत्ता सूचकांक कहा जाता है, वो वायु गुणवत्ता को दर्शाने वाला एक संख्यात्मक माप है। यह भविष्य के प्रदूषण स्तरों की भी भविष्यवाणी करता है। भारत में AQI को 6 स्तरों में बांटा गया है: अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), मध्यम (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400), और गंभीर (401-500)। भारत में AQI अक्सर विभिन्न प्रदूषण स्रोतों के कारण दिवाली के बाद सर्दियों के दौरान अपने चरम पर पहुंच जाता है।

अमेरिकी AQI प्रणाली शायद ही कभी 500 से अधिक होती है, जिसे वे खतरनाक मानते हैं। हालांकि, लगातार उच्च प्रदूषण स्तरों के कारण चीन का AQI 999 तक बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में सरकारें उत्सर्जन को कम करने के लिए आपातकाल की घोषणा कर सकती हैं, वाहनों के उपयोग को प्रतिबंधित कर सकती हैं, स्कूलों को बंद कर सकती हैं या उद्योगों को बंद कर सकती हैं।

जानिए क्या है CAQM?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में इसी समस्या से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक अहम कदम उठाते हुए एक व्यापक नीति तैयार की है। जिसे ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) कहा जाता है। यह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर विभिन्न स्तरों पर लागू किया जाता है।

GRAP के नियम और क्या-क्या उठाए जाते हैं कदम?

GRAP तब लागू किया जाता है, जब किसी शहर में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के प्रभाव को कम करना है। GRAP को चार स्तर में बांटा गया है, जो हवा की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं।

  • GRAP-1 में AQI 201-300 के बीच होता है, जो खराब श्रेणी में आता है।
  • GRAP-2 में AQI 301-400 के बीच होता है, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है।
  • GRAP-3 में AQI 401-450 के बीच होता है, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
  • GRAP-4 में AQI 450 से अधिक होता है, जिसे अत्यधिक गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।

GRAP के तहत प्रदूषण स्तर बढ़ने पर निर्माण गतिविधियों, वाहनों, और प्रदूषणकारी ईंधन पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

प्रदूषण के कितने कारक हैं?

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को 08 प्रदूषण कारकों के आधार पर तय करते हैं। ये PM10, PM 2.5, NO2, SO2, CO2, O3, और NH3 Pb होते हैं। वायु गुणवत्ता का आकलन करने के लिए इन्हें 24 घंटों में मापा जाता है।

प्रदूषण के कारकों की व्याख्या

  • सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) शहरों में प्रचलित कोयला और तेल जलाने से उत्पन्न होता है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO2) प्राकृतिक गैस या लकड़ी जैसे अधूरे ईंधन के दहन से उत्पन्न एक जहरीली गैस है; वाहन उत्सर्जन इसका प्रमुख स्रोत है। NO2 यानी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड उच्च तापमान दहन से उत्पन्न होता है।
  • NH3 अमोनिया कृषि प्रक्रियाओं और औद्योगिक कचरे से निकलता है। सूर्य के प्रकाश में प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से O3 ओजोन बनता है। PM2.5 कण हवा में मौजूद छोटे पदार्थ होते हैं, जो अपने स्तर के उच्च होने पर धुंध को बढ़ाते हैं। जिससे विजिबिलिटी का लेवल भी गिर जाता है।
  • वहीं PM 10 को पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है। इन कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास होता है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। बता दें कि PM 10 और 2.5 धूल, कंस्‍ट्रक्‍शन और कूड़ा-पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को उच्च AQI घटनाओं के दौरान विशेष रूप से जोखिम होता है। गर्भवती महिलाओं को भ्रूण के विकास को प्रभावित करने वाली जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

ये भी पढ़ें: भारत-PAK का ही प्रदूषण से ऐसा क्यों होता है हाल, सबसे ज्यादा धुंआ निकालने वाले चीन-US क्यों रहते हैं बेअसर?

हाई AQI स्तर धुंध या कोहरे के कारण दृश्यता कम कर सकता है। इससे यातायात दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है और फसलों को दीर्घकालिक नुकसान होता है, जिससे कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है। वन्यजीवों को भी नुकसान होता है क्योंकि वे उसी प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं।

तत्काल कार्रवाई में घर के अंदर रहना और बाहरी गतिविधियों से बचना शामिल है। खिड़कियों और दरवाजों को सील करने से घर के अंदर प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि उपलब्ध हो, तो एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना उचित है। जब बाहर जाना जरूरी हो, तो N95 या P100 मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।

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