Air India हादसे में लापरवाही पड़ी भारी, तीन कर्मचारियों की नौकरी खतरे में, जानें कैसे हुई सुरक्षा में चूक?
Air India plane crash : भारतीय विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयर इंडिया में पायलट और क्रू शेड्यूलिंग में गंभीर और बार-बार की गई अनियमितताओं को लेकर तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। DGCA का कहना है कि इन चूकों ने विमानन सुरक्षा के साथ एक खतरनाक खिलवाड़ किया है और इससे सुरक्षा मानकों की अवहेलना हुई है।
यह सख्त कदम उस समय उठाया गया है जब कुछ ही दिन पहले अहमदाबाद से लंदन के गैटविक जा रही एयर इंडिया की एक उड़ान टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 241 लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी के बाद एयर इंडिया के अंदर जांच का दायरा और गहरा हो गया है।

Air India पर क्या हैं DGCA के आरोप?
DGCA द्वारा 20 जून को जारी आदेश के अनुसार, एयर इंडिया ने स्वेच्छा से इस बात का खुलासा किया था कि उनके क्रू शेड्यूलिंग सिस्टम में गंभीर गड़बड़ियाँ सामने आई हैं। इन खुलासों में यह बात सामने आई कि कई बार ऐसे क्रू सदस्यों को उड़ानों के लिए तैनात किया गया जो लाइसेंस, रेस्ट पीरियड (आराम), और रीसेंसी (हाल की उड़ानें भरने की शर्तें) जैसे अनिवार्य मानकों को पूरा नहीं करते थे।
ये खामियाँ उस समय उजागर हुईं जब एयर इंडिया ने अपने पुराने ARMS (Aviation Resource Management System) से नए CAE Flight and Crew Management System में ट्रांज़िशन के बाद एक आंतरिक समीक्षा की। DGCA का मानना है कि ये केवल व्यक्तिगत लापरवाही नहीं हैं, बल्कि सिस्टम स्तर पर बड़ी विफलताएं हैं, जो एयरलाइन के क्रू शेड्यूलिंग, अनुपालन निगरानी, और आंतरिक जवाबदेही तंत्र की कमज़ोरी को दर्शाती हैं।
जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है
DGCA ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को इन चूकों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है:
- चूराह सिंह - डिविजनल वाइस प्रेसिडेंट
- पिंकी मित्तल - चीफ मैनेजर, ऑपरेशन्स निदेशालय, क्रू शेड्यूलिंग
- पायल अरोड़ा - क्रू शेड्यूलिंग - प्लानिंग विभाग
इन अधिकारियों पर अनधिकृत और असंगत क्रू जोड़ियों की तैनाती, लाइसेंसिंग और रीसेंसी के उल्लंघन, और शेड्यूलिंग प्रोटोकॉल और निगरानी में प्रणालीगत विफलताओं के गंभीर आरोप हैं।
DGCA ने अपने आदेश में क्या कहा?
DGCA ने अपने आदेश में कहा है, "इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से क्रू शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग से जुड़े सभी कार्यों और जिम्मेदारियों से हटा दिया जाए।"
इसके अलावा एयर इंडिया को निर्देश दिया गया है कि आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए और 10 दिनों के भीतर इसकी प्रगति रिपोर्ट DGCA को सौंपी जाए। जब तक क्रू शेड्यूलिंग में सुधार नहीं किया जाता, इन अधिकारियों को केवल गैर-ऑपरेशनल भूमिकाओं में रखा जाएगा और उन्हें किसी भी सुरक्षा या क्रू अनुपालन से संबंधित निर्णय में शामिल नहीं किया जाएगा।
क्या यह हादसे से जुड़ा मामला है?
भले ही आदेश में सीधे तौर पर दुर्घटनाग्रस्त उड़ान का उल्लेख नहीं किया गया हो, लेकिन DGCA का यह एक्शन उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जब 241 लोगों की जान गई थी। प्रारंभिक जांच रिपोर्टों में भी संकेत मिले हैं कि क्रू की थकान, अनुचित प्रशिक्षण, या अनियमित क्रू तैनाती हादसे के संभावित कारण हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया का यह खुलासा करना कि उसने स्वेच्छा से DGCA को सूचना दी, यह दिखाता है कि कुछ हद तक संस्थागत पारदर्शिता बरती जा रही है। हालांकि DGCA ने साफ किया कि, "स्वैच्छिक खुलासा सराहनीय है, लेकिन यह व्यापक प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करता है। विशेष चिंता का विषय यह है कि इन लापरवाहियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर समय रहते कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।"
DGCA का यह आदेश भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और जवाबदेही के मानकों को लेकर एक स्पष्ट संदेश है: कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वह कितनी भी ऊँचे पद पर बैठा व्यक्ति क्यों न हो। अब देखना ये है कि क्या वह इस संकट से उभरकर अपने सुरक्षा मानकों को मजबूत बना पाएगी या यह मामला उसके लिए और बड़ी चुनौती बन जाएगा?












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