आंख में कोरोना संक्रमण की मौजूदगी का पता लगाने के लिए AIIMS ने शुरू की स्टडी, आरपी सेंटर करेगा ये शोध
नई दिल्ली, सितंबर 08। कोरोना संक्रमण का आंख पर कितना असर पड़ता है? इसका पता लगाने के लिए एम्स के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थल्मिक साइंसेज ने दो स्टडी की शुरुआत की है। इन स्टडी के जरिए विशेषज्ञ ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि आंख के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस की मौजूदगी कहां तक हो सकती है। इसके लिए एक स्टडी आई बॉल यानि कि कोरोना से जान गंवाने वाले मरीजों की आंख पर की जाएगी तो वहीं दूसरी स्टडी उन मरीजों पर होगी, जो कॉर्निया दान करते हैं और कभी कोरोना से संक्रमित रह चुके हैं।
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आरपी सेंटर के प्रमुख ने स्टडी के बारे में दी जानकारी
मंगलवार को नेशनल आई बैंक के द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरपी सेंटर के प्रमुख जेएस टिटियाल ने इन स्टडीज के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्टडी के लिए पांच नेत्र गोलक एकत्र किए गए हैं। टिटियाल ने कहा, "स्टडी से कोविड-19 संक्रमित मृतक के कॉर्निया, ऑप्टिक नर्व और रेटिना में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलेगी।"
कोरोना काल में प्रभावित हुआ है कॉर्निया दान कार्यक्रम
जेएस टिटियाल ने बताया कि कोरोना काल में कॉर्निया दान करने का कार्यक्रम काफी प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि 80 फीसदी कॉर्निया डोनेट अस्पताल के कार्यक्रम के जरिए ही किया गया है। इनमें 5.5 फीसदी दान हुए कॉर्निया में कोरोना संक्रमण मिला है, इसलिए इस स्टडी की शुरुआत हुई है। आरपी सेंटर की डॉक्टर नम्रता शर्मा ने कहा कि, ''इन ऊतकों में कोरोना वायरस की उपस्थिति का पता लगाने और आनुवंशिक सबूतों की तलाश के लिए नेत्र गोलकों के विभिन्न आणविक परीक्षण किये जाएंगे।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति भी पहुंचे
आपको बता दें कि मंगलवार को नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर एम्स के आरपी सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी पहुंचे थे। उन्होंने इस दौरान लोगों से नेत्रदान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि किसी के जीवन में रोशनी देने की सहायती की जाए तो उससे बड़ा कुछ नहीं होता।












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