AIIMS डायरेक्टर बोले- वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी, बताया कैसे बिना घर से बाहर गए हो रहा कोरोना?
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वायरस हो चुका है अधिक संक्रामक
एक टीवी चैनल से बातचीत में डॉक्टर गुलेरिया ने कहा "जहां तक अभी भारत में पाए गए वेरिएंट की बात है, हमारे पास जो भी सीमित डाटा है उसके आधार पर हम कह सकते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि वायरस और संक्रामक हो चुका है। और यही वजह है कि हम इतने कम समय में संक्रमण के मामले में इतनी तेजी से वृद्धि देख रहे हैं।"
डॉ गुलेरिया ने कहा कि वर्तमान डाटा पर्याप्त नहीं है। इसलिए और डाटा इकठ्ठा किया जा रहा है ताकि ये पता लगाया जा सके कि क्या कोविड का नया स्ट्रेन अधिक संक्रामक है? गुलेरिया ने आगे कहा कि भारत में कोविड मामलों में मृत्युदर अभी भी कम है लेकिन हेल्थकेयर सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।

बिना घर से बाहर गए भी हो सकता है संक्रमण
जब गुलेरिया से पूछा गया कि लोग बिना घर से बाहर निकले ही संक्रमण का शिकार हो रहे हैं तो उन्होंने कहा यह समझना जरूरी है कि वायरस कैसे फैलता है। गुलेरिया कहते हैं कि "हो सकता है आप बाहर न जाते हों। ऐसे बहुत लोग हैं जो कहते हैं कि उनके परिजन कभी बाहर नहीं गए। लेकिन उनके घर में एसी रिपेयर करने वाला आता है। गर्मियां आ चुकी हैं तो बहुत सारे लोग एसी साफ करवाते हैं या फिर घर में काम वाली आती है और कमरे को साफ करती है, खाना बनाती है। तो शायद आप बाहर नहीं जाते हैं लेकिन एसिम्पटोमैटिक व्यक्ति शायद आपके घर में आया हो और घर में संक्रमण दे गया हो।"
गुलेरिया ने बताया कि कोविड की दूसरी लहर के दौरान भी प्रमुख लक्षण पहले जैसे ही हैं जिनमें बुखार, सर्दी, शरीर में दर्द, गले में खराश, डायरिया, उल्टी शामिल हैं। इसके साथ ही डॉक्टर एन95 मास्क या फिर डबल मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं।

बच्चों को अधिक सुरक्षित रखने की जरूरत
गुलेरिया कहते हैं कि ऐसे लोग जो 14 दिन पहले पॉजिटिव पाए गए थे और 10 दिन के बाद से एसिम्पटोमैटिक हैं या फिर तीन दिन से उन्हें कोई बुखार नहीं है, ऐसे लोग अब संक्रामक नहीं हैं। बशर्ते पिछले 14 दिनों में उनमें कोई गंभीर लक्षण न दिखाई दिए हों।
बच्चों को लेकर डॉक्टर गुलेरिया ने कहा "बच्चों को सुरक्षित रखने की जरूरत है क्योंकि सामान्य तौर पर उनमें कोविड-19 के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन ये घर में बड़ों को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए बच्चों को सुरक्षित रखने की जरूरत है केवल इसलिए सुरक्षित करने की जरूरत नहीं है कि वे संक्रमित हो सकते हैं बल्कि इस नजरिए से भी देखने की जरूरत है कि वे अपने दादा-दादी को संक्रमित कर सकते हैं जिनके लिए खतरा सबसे ज्यादा है।"












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