कोरोना वायरस संक्रमण पर बोले विशेषज्ञ- लोगों में पैनिक, व्हाट्सऐप मैसेज पर ना करें यकीन
विशेषज्ञ बोले- कोरोना वायरस को लेकर लोगों में पैनिक, व्हाट्सऐप मैसेज पर ना करें यकीन
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच विशेषज्ञों ने कहा कि देश में एक डर का माहौल है लेकिन इससे हालात में सुधार नहीं होगा। पैनिक के बजाय सभी को इससे मिलकर लड़ने की जरूरत है। साथ ही किसी भी खबर या व्हाट्सऐप के मैसेज पर यकीन कर घबराना नहीं है। जो विशेषज्ञ कह रहे हैं, उसी पर यकीन करना है। रविवार को दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया, मेडिसिन एम्स के एचओडी डॉ. नवीन विग, एम्स में जनरल हेल्थ सर्विसेज के महानिदेशक डॉ. सुनील कुमार और मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहान ने एक साथ आकर कोरोना वायरस संक्रमण से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए ये कहा है।

एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा, कोरोना वायरस की मौजूदा स्थिति में जनता में पैनिक है, लोगों ने घर में इंजेक्शन, सिलेंडर रखने शुरू कर दिए हैं जिससे इनकी कमी हो रही है। ये समझने की जरूरत है कि कोविड19 आम संक्रमण है। 85 से 90 फीसदी लोगों में ये आम बुखार, जुकाम होता है इसमें ऑक्सीजन, रेमडेसिविर की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में बहुत घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर को लेकर बहुत मारामारी है। ऐसे में ये समझना होगा कि जो मरीज घर हैं और जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से ज्यादा है उन्हें रेमडेसिविर की कोई जरूरत नहीं है और अगर आम रेमडेसिविर लेते हैं तो उससे आपको नुकसान ज़्यादा हो सकता है, फायदा कम होगा।
5-7 दिन में को हालात काबू में होंगे
मेदांता चेयरमैन डॉ. त्रेहान ने कहा, जैसे ही आपकी RT-PCR रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, मेरी सलाह होगी कि आप अपने स्थानीय डॉक्टर से संपर्क करें। सभी डॉक्टर प्रोटोकॉल जानते हैं और उसी के अनुसार आपका इलाज शुरू करेंगे। समय पर सही दवा दी जाए तो 90 फीसदी मरीज घर पर ठीक हो सकते हैं। अगर जररूत महसूस नहीं होती है तो अस्पताल आने से बचें। उन्होंने बताया कि हमारे स्टील प्लांट की ऑक्सीजन की बहुत क्षमता है लेकिन उनको ट्रांसपोर्ट करने के लिए क्रायो टैंक की जरूरत होती है जिसकी तादाद इतनी नहीं थी। सरकार ने आयात किया है, उम्मीद है कि आने-वाले 5-7 दिन में स्थिति काबू में आ जाएगी।
व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी पर ना दें ध्यान
एम्स में जनरल हेल्थ सर्विसेज के महानिदेशक डॉ. सुनील कुमार ने कहा, 2020 में नए वायरस आए और हम तैयार नहीं थे। भारत सरकार ने इसके बाद तैयारी करते हुए परीक्षण क्षमता को बढ़ाया है। हमें विश्वास होना चाहिए कि हमारा सरकार डॉक्टरों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, महामारी विज्ञानियों के सुझावों के साथ ठोस और वैज्ञानिक कदम उठाती है। समाचारों पर ज्यादा ध्यान ना दें। केवल चुनिंदा समाचार देखें। एक व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी चल रही है। इस पर ध्यान ना दें। जिम्मेदार व्यवहार का पालन करें। इस व्यवहार का आपको, डॉक्टरों, समाज के साथ-साथ मीडिया को भी पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को लेकर कई तरह की अफवाहें फैली हुई हैं। टीके से कोई दुष्परिणाम नहीं हुए है।
एचओडी ऑफ मेडिसिन, एम्स, डॉ. नवीत विग ने कहा कि संक्रमण को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि चेन को तोड़ा जाए, चेन के टूटने से ही रोगियों की संख्या कम होगी। हमारा एकमात्र लक्ष्य चेन को तोड़ना होना चाहिए। जिलों में ही ये ध्यान रखा जाए कि पॉजिटिविटी रेट एक से दो फीसदी तक रहे।












Click it and Unblock the Notifications