एम्स ने डॉक्टरों से हड़ताल से लौटने की अपील, कहा-'काम पर वापस लौट आइए, मरीज परेशान हो रहे'
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला जूनियर डॉक्टर की हत्या के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार को दसवें दिन भी जारी रही। चल रही हड़ताल ने राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिससे मरीज परेशान हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद हड़ताल जारी है।
बढ़ते हालात के मद्देनजर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक ने रेजिडेंट डॉक्टरों से तुरंत अपनी ड्यूटी पर लौटने का आग्रह किया है। इस अपील का उद्देश्य हड़ताल से काफी प्रभावित हुई रोगी देखभाल सेवाओं में सामान्य स्थिति बहाल करना है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला शुरू में आशाजनक लग रहा था। आरएमएल अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस फैसले के बाद अपनी हड़ताल खत्म करने की योजना की घोषणा की थी। हालांकि बाद में साथी रेजिडेंट डॉक्टरों के दबाव के चलते उन्होंने अपना रुख बदल दिया।
एम्स और सफदरजंग अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों ने भी हड़ताल वापस लेने से मना कर दिया है। नतीजतन डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के कारण चिकित्सा सेवाओं में व्यवधान जारी है।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। लेकिन हड़ताल जारी रखने पर अड़ा हुआ है। डॉक्टरों एसोसिएशन की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से एक अलग कानून या अध्यादेश की मांग पर जोर देता है। जो अभी तक पूरी नहीं हुई है।
हड़ताल के कारण कई मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अस्पताल कम कर्मचारियों की समस्या से जूझ रहे हैं।जिसके कारण उपचार और सर्जरी में देरी हो रही है। उन्हें रद्द करना पड़ रहा है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने में रेजिडेंट डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।












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