अमित शाह के अश्वमेघ में ये राज्य है बड़ा रोड़ा, नहीं है एक भी विधायक

नई दिल्ली। अध्‍यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने बीजेपी को उन राज्‍यों में बंपर जीत दिलाई, जहां उनकी पार्टी गठबंधन करके भी विजय के लिए तरस रही थी। दिल्‍ली और बिहार छोड़कर अमित शाह के 'अश्वमेघ' को कोई नहीं रोक पाया। हालांकि, इन दोनों राज्‍यों में भी उन्‍होंने अपना परचम लहराया, पहले दिल्‍ली नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी को मात दी और बाद में बिहार में नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार बना ली। अमित शाह पश्चिम बंगाल में लगातार पैठ बढ़ रहे हैं, लेकिन एक राज्‍य ऐसा है, जहां उनके 'अश्वमेघ' के कदम ठहर ही नहीं पा रहे हैं। तमिलनाडु के राजनीति के चक्रव्‍यूह में मोदी के चुनावी 'चाणक्‍य' ऐसे फंसते दिखाई दे रहे हैं जैसे द्रोणाचार्य के रचे चक्रव्‍यूह में अभिमन्‍यु घुस तो गया था, लेकिन निकल नहीं पाया था। कुछ ऐसा ही अमित शाह के साथ भी हो रहा है।

234 विधानसभा सीटों वाले राज्‍य में बीजेपी के पास एक भी विधायक नहीं

234 विधानसभा सीटों वाले राज्‍य में बीजेपी के पास एक भी विधायक नहीं

तमिलनाडु की राजनीति में बीजेपी लंबे समय से पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन 234 विधानसभा सीटों वाले इस राज्‍य में बीजेपी के पास अब तक एक भी सीट नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो AIAMDK के पलानिसामी और पन्‍नीरसेल्‍वम धड़े का विलय कराने के पीछे अमित शाह का ही दिमाग था। सोमवार को दोनों धड़ों का विलय हो भी गया और पन्‍नीरसेल्‍वम को डिप्‍टी सीएम बनाया गया, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही तमिलनाडु की राजनीति 360 डिग्री घूम गई। टीटीवी दिनाकरन ने अपने 19 भरोसेमंद विधायकों को साथ मिलाया और पलानिसामी को हटाने की मांग कर डाली है। बताया जा रहा है कि सभी विधायक एक रिजॉर्ट में हैं।

बेकार गया अमित शाह का दांव

बेकार गया अमित शाह का दांव

अब अमित शाह के पास बेहद सीमित विकल्‍प हैं। AIAMDK के दोनों धड़ों को मिलाकर अमित शाह एक तीर से दो निशाने साधने की तैयारी में थे। पहला- AIAMDK को एनडीए में शामिल करा, राज्‍यसभा में अपनी स्थिति मजबूत करना। दूसरा- AIAMDK के साथ मिलकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी जीत दिलाना, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के चलते उनके दोनों मकसद खटाई में पड़ गए हैं।

नई कैबिनेट में करना चाहते थे ऐलान, अब कठिन हुई राह

नई कैबिनेट में करना चाहते थे ऐलान, अब कठिन हुई राह

AIAMDK के दोनों धड़ों का विलय कराने के बाद अमित शाह नई कैबिनेट में इस पार्टी के नेताओं को जगह देने की तैयारी में थे। नई कैबिनेट की तैयारियां और AIAMDK में लगातार बदलती स्थिति के चलते अमित शाह दो बार तमिलनाडु दौरा टाल चुके हैं।

दक्षिण में सबसे बड़ी चुनौती बना तमिलनाडु

दक्षिण में सबसे बड़ी चुनौती बना तमिलनाडु

उत्‍तर में हरियाणा, यूपी से लेकर पश्चिम में गुजरात तक मोदी और शाह की जोड़ी को अपार सफलता मिली है। पूर्वोत्‍तर में भी पार्टी सफलता के झंडे गाड़ रही है। दक्षिण भारत की बाात करें तो कर्नाटक में कमल खिल ही चुका है और आने वाले विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को बड़ी जीत की उम्‍मीद है। हालांकि, कर्नाटक के हालिया सर्वे बीजेपी को अच्‍छे संकेत नहीं दे रहे हैं।

संगठन हो रहा मजबूत

संगठन हो रहा मजबूत

केरल जैसे राज्‍य में जहां पार्टी का नामो-निशान तक नहीं था, वहां भी बीजेपी को पिछले विधानसभा चुनावों में 10 प्रतिशत वोट मिले। हालांकि, केरल में बीजेपी का एक ही विधायक जीता, लेकिन पार्टी ने 10 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस की इस राज्‍य में लुटिया ही डुबो दी। अब बचा तमिलनाडु, जहां बीजेपी का एक भी विधायक नहीं है। हालांकि, आंध्र प्रदेश में भी पार्टी की स्थिति बहुत अच्‍छी नहीं है, लेकिन वहां पार्टी का खाता खुल चुका है और संगठन लगातार मजबूत किया जा रहा है।

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