अग्निवीरों के युग की शुरुआत, हैदराबाद Artillery सेंटर में ट्रेनिंग शुरू, जानें क्या कह रहे हैं अग्निवीरवायु ?

हैदराबाद के आर्टिलरी रेजिमेंट में आज से 2200 अग्निवीरों के पहले बैच की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। जबकि, अग्निवीरवायु का प्रशिक्षण शुक्रवार से ही कर्नाटक के बेंगलुरु में चल रहा है। इस अग्निपथ योजना का बहुत विरोध हुआ था।

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अग्निपथ योजना जल्द ही धरती पर नजर आएगी। अग्निवीरों की ट्रेनिंग का आगाज हो गया है। पहले अग्निवीरवायु का प्रशिक्षण शुरू हुआ और रविवार से हैदराबाद स्थिति आर्टिलरी रेजिमेंट में अग्निवीरों की औपचारिक ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। पिछले साल जब अग्निपथ स्कीम की घोषणा की गई थी तो इसका जबर्दस्त विरोध नजर आया था। लोगों का गुस्सा सार्वजनिक संपत्तियों खासकर भारतीय रेलवे पर उतरा था। लेकिन, जब भर्ती की शुरुआत हुई तो युवाओं में अग्निवीर बनने के लिए जबर्दस्त उत्साह नजर आने लगा। आज भी इस योजना में शामिल अग्निवीरों के उत्साह का ठिकाना नही है।

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    हैदराबाद आर्टिलरी सेंटर में अग्निवीरों की ट्रेनिंग शुरू

    हैदराबाद आर्टिलरी सेंटर में अग्निवीरों की ट्रेनिंग शुरू

    हैदराबाद स्थित आर्टिलरी सेंटर में अग्निवीरों के पहले बैच की ट्रेनिंग की रविवार से औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। इंडियन आर्मी के सदर्न कमांड ने 27 दिसंबर को एक ट्वीट में जानकारी दी थी कि आर्टिलरी रेजिमेंट के पहले बैच के अग्निवीर ट्रेनिंग के लिए हैंदराबाद सेंटर पहुंच चुके है। इसने लिखा था, 'सेंटर उन युवा रंगरूटों को ट्रेनिंग देने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो अपने जीवन में नए अध्याय की शुरुआत करने के लिए जोश और उत्साह से भरे हुए मालूम पड़ रहे हैं।' रविवार को पहले बैच में 2200 से ज्यादा अग्निवीरों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

    8 महीनों तक होगी अग्निवीरों की ट्रेनिंग

    8 महीनों तक होगी अग्निवीरों की ट्रेनिंग

    अगले 8 महीनों तक ये युवा रंगरूट भारतीय सेना के अनुशासित सिपाही के तौर पर हर मोर्चे पर प्रशिक्षित किए जाएंगे। इन रंगरूटों को ट्रेनिंग से पहले शारीरिक और मेडिकल जांच के कठिन दौर से गुजरना पड़ा है। इनकी लिखित परीक्षा भी हुई है और सारे दस्तावेजों की पड़ताल के बाद से इन्होंने 24 दिसंबर से हैदराबाद के आर्टिलरी सेंटर में रिपोर्टिंग करनी शुरू कर दी थी। ट्रेनिंग शुरू होने से पहले आर्टिलरी सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर राजीव चौहान ने इन अग्निवीरों का स्वागत किया और उनसे बातीत की।

    2023 के अंत तक 8000 अग्निवीरों की ट्रेनिंग

    2023 के अंत तक 8000 अग्निवीरों की ट्रेनिंग

    अग्निवीरों की ट्रेनिंग पुख्ता तरीके से हो इसके लिए इसकी शुरुआत से पहले बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है और सभी तरह की प्रशासनिक तैयारियां पूरी की गई हैं, ताकि अग्निवीरों को प्रशिक्षण के दौरान किसी तरह के दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। अग्निपथ योजना के तहत 8,000 से ज्यादा ऐसे अग्निवीरों की भर्ती की गई है, जिनकी 2023 के अंत तक ट्रेनिंग होनी है। इन्हें चार साल तक अनिवार्य रूप से सशस्त्र सेना में अपनी सेवाएं देनी है। इन्हें अनुशासित, कुशल और सैन्य प्रकृति में इस तरह से ढाला जा रहा है, जो राष्ट्र और समाज के लिए लाभदायक साबित हो।

    जोश और उत्साह से भरे हुए हैं अग्निवीर- रक्षा मंत्रालय

    जोश और उत्साह से भरे हुए हैं अग्निवीर- रक्षा मंत्रालय

    29 दिसंबर को हैदराबाद स्थित रक्षा मंत्रालय के पीआरओ के ट्विटर हैंडल पर इनके बारे में लिखा गया था, 'आर्टिलरी रेजिमेंट के पहले बैच के अग्निवीर हैदराबाद सेंटर में प्रशिक्षित सैनिकों के रूप में परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं.......युवा रंगरूट अपने जीवन की नई शुरुआत के लिए जोश और उत्साह से भरे हुए हैं। #IndianArmy.'

    बेंगलुरु में शुरू हुई अग्निवीरवायु की ट्रेनिंग

    बेंगलुरु में शुरू हुई अग्निवीरवायु की ट्रेनिंग

    गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के अग्निवीरवायु के पहले बैच की ट्रेनिंग की शुरुआत पिछले शुक्रवार को ही कर्नाटक के बेलगावी में शुरू हो गई थी। रक्षा मंत्रालय के बेंगलुरु पीआरओ ने ट्विटर पर इनकी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा था, 'आज से बेलगावी के एयरमैन ट्रेनिंग स्कूल में अग्निवीरवायु के पहले बैच की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। ट्रेनिंग कमांड के एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह PVSM, AVSM, VrC, VSM, ADC, AOC-n-C ने एटीएस बेलगावी का दौरा किया और अग्निवीरवायु के नई भर्ती वाले बैच को संबोधित किया।'

    क्या कह रहे हैं अग्निवीरवायु ? सुनिए

    भारतीय वायु सेना ने पिछले साल 24 जून को इस भर्ती के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू की थी। गौरतलब है कि जब पिछले साल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ स्कीम की घोषणा की थी तो इसके विरोध में जबर्दस्त उपद्रव किया गया था। अरबों रुपए की राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। यह विरोध इस वजह से किया जा रहा था कि इसमें सिर्फ 4 साल के लिए तीनों सेनाओं में भर्ती की व्यवस्था है। इसके बाद अधिकतम 25 फीसदी अग्निवीरों को ही स्थायी किया जा सकता है। लेकिन, सच्चाई ये है कि विरोध एक तरफ हुआ, लेकिन इसके लिए आवेदन देने वालों की भी भरमार देखने को मिल रही है। (सौजन्य: पहली तस्वीर-रक्षा मंत्रालय पीआरओ,हैदराबाद, छठी तस्वीर- रक्षा मंत्रालय पीआरओ,बेंगलुरु )

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