जवाहर बाग के नक्सली रामबृक्ष के शव को लेने कोई नहीं आया, हुआ अंतिम संस्कार
लखनऊ। जवाहर बाग में अवैध कब्जे का मास्टर माइंड रामबृक्ष यादव की मौत के बाद तीन दिन तक उसके शव की कोई शिनाख्त करने भी नहीं आया। जिसके बाद आखिरकार पुलिस ने उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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मथुरा में जवाहर बाग में अवैध कब्जे को हटाने गयी पुलिस टीम के साथ मुठभेड़ में रामबृक्ष के 24 साथियों की मौत हो गयी थी। जिनका एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस ऑपरेशन में एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार भी शहीद हो गये थे।
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शुरुआती पड़ताल में जो इस ऑपरेशन में हुई त्रासदी के लिए कई अहम वजहें निकलकर सामने आयी हैं। पहली वजह जो सामने आयी है वह है यूपी सरकार ने इस कब्जे को हटाने के लिए पर्याप्त फोर्स देने में निष्क्रियता दिखायी।
मथुरा प्रशासन ने यूपी सरकार को 11 फरवरी 2015 को एक पत्र लिखा था जिसमें जवाहर बाग के भीतर के हालात पर चिंता जताते हुए इसे बहुत खतरनाक बताया गया था। 29 सितंबर 2015 को फिर से एक पत्र लिखा गया। लेकिन किसी भी पत्र पर सरकार ने सुनवाई नहीं की।
पुलिस प्रशासन के फेल होने के बाद विजयपाल तोमर ने कोर्ट में पीआईएल दायर की जिसके बाद 20 फरवरी को डीएम ने पत्र लिखा। कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए फोर्स तो भेजी गयी लेकिन पर्याप्त फोर्स नहीं होने की वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।
जवाहर बाग में रामबृक्ष के कमरे से जो रजिस्टर मिला है उसमें उसके नक्सलियों के साथ रिश्तों की भी बात सामने आयी है जिसमें उसे नक्सलियों से मिलने वाली आर्थिक मदद का ब्योरा है। रामबृक्ष को ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से आर्थिक मदद मिल रही थी। इन पैसों से वह भंडारों का आयोजन कराता था।












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