तीन तलाक पर फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बड़ा ऐलान
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम लॉ बोर्ड ने कहा कोर्ट का सम्मान करते हैं, पर शरिअत में दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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नई दिल्ली। एक साथ तीन तलाक कहकर तलाक देने पर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने रोक लगाते हुए इस मामले पर केंद्र सरकार को कानून बनाने को कहा है, उसके बाद पहली बार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की पहली बैठक हुई है। बैठक में यह नतीजा लिया गया है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन शरीअत में किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही नहीं बोर्ड ने कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के लिए दस सदस्यों की एक समिति बनाई है जो इस बात का फैसला करेगा कि क्या कोर्ट के फैसले में शरीअत को लेकर किसी भी तरह की खामी तो नहीं है।

धार्मिक स्वतंत्रता में हनन नहीं बर्दाश्त
बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार को भी निशाने पर लिया गया है, इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा जो हलफनामा दिया गया है वह सही नहीं है। बोर्ड ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का हनन मुस्लिम समुदाय किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा बोर्ड के अहम सदस्य कमाल फारुकी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक देना पाप है, लेकिन यह वैध है। उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने जो हलफनामा दाखिल किया है हम उसका विरोध करते हैं।

केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कमाल फारुकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा हलफनामा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर हमला है, केंद्र सरकार संविधान में हमें दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का हनन कर रही है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। बोर्ड के अध्यक्ष मोलाना रब्बे हाशमी नदवी, महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी, उपाध्यक्ष डॉ. सैय्यद कल्बे जव्वाद, मोहम्मद सलीम कासमी, सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सचिव जफरयार गिलानी ने भी इस बैठक में शिरकत की और एक सुर में कहा कि वह शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस बैठक में बोर्ड के कुल 45 सदस्यों न हिस्सा लिया।

ओवैसी ने तैयार किया फैसला
बैठक में हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हमने तमाम सदस्यों की राय को जाना है, इससे यह साफ होता है कि अभी भी सभी लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही से नहीं समझा है। ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सार तैयार किय है। उन्होंने तमाम वकीलों की मदद से कोर्ट के फैसले का सार तैयार किया और बोर्ड के तमाम सदस्यों के बीच इसे साझा किया।

तीन तलाक देने वालों का होगा बहिष्कार
बोर्ड की इस अहम बैठक में यह फैसला भी लिया गया है कि जो लोग तीन तलाक लेंगे उनका बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही बोर्ड न कहा कि तीन तलाक को लेकर हमने पहले ही प्रस्ताव पारित कर दिया था, लिहाजा बड़े स्तर पर सामाजिक सुधार कार्यक्रम चलाने की जरूरत है, इसके लिए हमें वित्तीय मदद चाहिए। बोर्ड ने इस बाबत सरकार से वित्तीय मदद की मांग की है। वहीं जो पुरुष महिलाओं को तीन तलाक देते हैं उनके बहिष्कार का फैसला लिया गया है, इस बाबत बकायदा प्रस्ताव पारित किया गया है।












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