अब बबुआ अखिलेश ने ना दिया साथ तो खत्म हो जाएगा बुआ मायावती का करियर!
राज्यसभा से भले ही मायावती ने इस्तीफा दे दिया हो लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने उन्हें इस्तीफा देने से रोका था। हालांकि मायावती अपने फैसले पर डटी रहीं।
नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा को इस्तीफा दे दिया। वह सहारनपुर के मुद्दे पर सदन में बोलना चाहती थीं, लेकिन समय दिए जाने पर वह वॉकआउट कर गईं और कुछ देर बाद ही इस्तीफा दे डाला। राज्यसभा मायावती का कार्यकाल अप्रैल 2018 तक था।

सांसदों ने इस्तीफा देने से रोका था
राज्यसभा से भले ही मायावती ने इस्तीफा दे दिया हो लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने उन्हें इस्तीफा देने से रोका था। हालांकि मायावती अपने फैसले पर डटी रहीं और सांसदों की नहीं सुनीं। बहरहाल, गुस्से में मायावती ने इस्तीफा तो दे दिया है, लेकिन अब उनके लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

राज्यसभा लौटना होगा थोड़ा मुश्किल
राज्यसभा से इस्तीफे के बाद अब यहां भी बसपा सुप्रीमो मायावती की वापसी आसान नहीं है और होगी भी तो एक साल बाद, वो भी बबुआ यानी अखिलेश यादव की मदद से। मतलब अब वो वक्त आ गया है, जब बुआ को बबुआ के सहारे की सख्त जरूरत पड़ने वाली है।

यूपी चुनाव में मायावती की पार्टी को मिली हैं 19 सीटें
2017 विधानसभा चुनाव में मायावती को 403 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 19 सीटें ही मिलीं। ऐसे में मायावती के पास अब राज्यसभा में वापसी के लिए एकमात्र विकल्प यही बचता है कि वह अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा से गठबंधन कर लें। भाई मुलायम सिंह के साथ तो उनकी पूरी जिंदगी 36 का आंकड़ा रहा है, क्या पता भतीजे अखिलेश के साथ ही उनकी राजनीतिक खिचड़ी पक जाए।

ये है वोटों का गणित
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीट हैं। यहां से 11 राज्सयभा सदस्यों का चुनाव होता है। कुल विधायकों की संख्या को 11 सीटों में 1 जोड़कर विभाजित किया जाता है यानी 403 बटा 12 यानी 33 और फिर इसमें 1 जोड़ दिया जाता है, यानी 34। मतलब ये हुआ कि यूपी से किसी भी सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 34 वोटों की जरूरत होगी, जबकि मायावती के पास केवल 19 विधायक हैं। इससे आप समझ सकते हैं मायावती को बबुआ के सहारे की कितनी ज्यादा जरूर है। सपा को यूपी में 2017 चुनाव में 47 सीटों पर जीत मिली थी।












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