कांग्रेस से दूरी के बाद जानिए क्या हो सकती है प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति
नई दिल्ली, 27 अप्रैल। प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरों पर मंगलवार को आखिरकार विराम लग गया। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और खुद प्रशांत किशोर ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। कुछ अहम बातों को लेकर प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते दोनों ने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। ऐसे में अब जब प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं,उसके बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि अब प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति क्या होगी। क्या वह तीसरे मोर्चे के साथ जाएंगे, खुद की पार्टी बनाएंगे, या किसी अन्य भूमिका में नजर आएंगे, हम इन्हीं विकल्पों पर हाल के दिनों में हुई राजनीतिक उठापटक के आधार पर चर्चा करेंगे।

ट्वीट डिलीट कर दिया ये संकेत
हालांकि कांग्रेस में शामिल नहीं होने की प्रशांत किशोर ने ट्वीट करके जानकारी दी है। लेकिन अहम बात यह है कि प्रशांत किशोर ने इस बाबत एक ट्वीट किया, जिसे बाद में उन्होंने डिलीट करके दोबारा ट्वीट किया। खास बात यह है कि जो ट्वीट प्रशांत किशोर ने डिलीट किया उसमे सिर्फ एक शब्द ही नहीं था उदार यानि generous. प्रशांत किशोर नए ट्वीट के जरिए यह साफ करना चाहते थे कि कांग्रेस ने उन्हें काफी उदार प्रस्ताव दिया था, जोकि सिर्फ प्रस्ताव नही था। वही कांग्रेस की ओर से भी जो ट्वीट किया गया है उसमे भी तल्ख शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। लिहाजा माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस बात की गुंजाइश अभी भी बाकी है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस के साथ काम करने को लेकर चर्चा कर सकते हैं।

आने वाले समय में फिर से जुड़ सकते हैं कांग्रेस के साथ
दरअसल प्रशांत किशोर अभी से चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करे जबकि कांग्रेस का मानना है कि पार्टी को अभी इस साल और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर ध्यान देना चाहती है। आने वाले समय में इस साल गुजरात, हिमाचल प्रदेश और अगले साल कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में चुनाव होना है, इनमे से कई जगह पर कांग्रेस सीधे पहले या दूसरे नंबर की पार्टी है। पीके ने कई क्षेत्रीय दलों के साथ 2024 के मद्देनजर गठबंधन की बात कही थी,लेकिन कांग्रेस फिलहाल आगामी राज्यों के चुनाव पर ध्यान देना चाहती है जबकि पीके लोकसभा चुनाव पर। ऐसे में संभव है कि आने वाले समय में इन राज्यों में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर पीके और कांग्रेस एक साथ आने को लेकर चर्चा कर सकती है।

मुख्य धारा की राजनीति में एंट्री
गौर करने वाली बात है कि प्रशांत किशोर ने पिछले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जीत के बाद कहा था कि वह अब राजनीतिक सलाहकार का काम नहीं करेंगे। उन्होंने अपनी संस्था आई-पैक से खुद को अलग कर लिया था और कहा था कि यह संस्था आगे यह काम जारी रखेगी। जिसके बाद पीके ने कांग्रेस के साथ बातचीत का दौर शुरू किया। अहम बात यह है कि पीके का अभी भी अपनी संस्था आई-पैक के साथ संबंध बरकरार है,लिहाजा साफ है कि प्रशांत किशोर राजनीतिक रणनीतिकार की बजाए मुख्य धारा की राजनीति में आना चाहते हैं।

नई टीम बनाने में जुटे पीके
प्रशांत किशोर के समर्थन में बना टीएम पीके फेसबुक पेज एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। यह पेज मंगलवार को पीके के ऐलान के बाद सक्रिय हुआ है। इस पेज पर एक पोस्ट किया गया है जिसमे प्रशांत किशोर की तस्वीर के साथ टैग लाइन लिखी है, मैं जबतक जीवित हूं बिहार के लिए समर्पित रहूंगा। इस पेज को तकरीबन 2 लाख लोगों ने लाइक किया है। इस पेज पर प्रशांत किशोर से जुड़े तमाम अपडेट किए जाते हैं। इसके साथ ही इस पेज पर लोगों को टीम पीके के साथ काम करने के लिए न्योता दिया जा रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि अगर आप पीके के साथ नए सफर में जुड़ना चाहते हैं तो आवेदन कीजिए।

तीसरे मोर्च को एकजुट करने में अहम
ऐसे में साफ है कि एक तरफ जहां आई-पैक उन तमाम दलों के साथ मिलकर काम कर रहा है। वहीं प्रशांत किशोर भी भाजपा विरोधी दलों के नेताओं के साथ चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में संभव है कि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक एक मोर्चा का नेतृत्व कर सकते हैं, विपक्षी दलों को एकजुट करने में पीके अहम किरदार निभा सकते हैं क्योंकि अधिकतर के साथ वह बतौर चुनावी रणनीतिकार काम कर चुके हैं। यही नहीं प्रशांत किशोर खुद के गृह राज्य बिहार से अपनी राजनीतिक उपस्थिति को दर्ज कराने की भी हर संभव कोशिश करेंगे।












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