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रिकॉर्ड एनकाउंटर के बाद भी उत्तर प्रदेश में क्यों बढ़ रहा है अपराध का ग्राफ?

नई दिल्ली। सोनभद्र, संभल और अब अमेठी। उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक अपराध की बड़ी वारदातों से फिर सियासत गर्मा गई है। अमेठी में रिटायर्ड आर्मी अफसर की पीट-पीटकर हत्या पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा है, उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था अब प्रशासन के हाथ से निकल गई है। अपराध होते जा रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार की मंशा केवल लीपा-पोती करने की है।

उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की सूची से बाहर लाने में जो सबसे बड़ा अड़ंगा माना जाता रहा है, तो वो है बेखौफ अपराधी और लचर कानून व्यवस्था। जब भारी बहुमत हासिल कर 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो प्रदेश को अपराध मुक्त कर ऐसा माहौल बनाने का वादा किया गया, जिसमें अपराधी खौफ खाएं और आम लोग भयमुक्त होकर प्रदेश की खुशहाली में अपना योगदान दे सकें।

योगी की एनकाउंटर नीति पर सवाल?

योगी की एनकाउंटर नीति पर सवाल?

सीएम की कुर्सी संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने पहला काम किया कि उत्तर प्रदेश को अपराध प्रदेश की छवि से मुक्त किया जाए ताकि एक भयमुक्त माहौल बनाया जा सके और प्रदेश में उद्योग धंधे लगाने के लिए अधिक से अधिक इन्वेस्टर्स को आकर्षित किया जा सके। कोई भी बड़ा निवेशक उत्तर प्रदेश में पैसा लगाने से इसलिए कतराता रहा है क्योंकि अपराधियों के बेखौफ होने से उन्हें अपनी पूंजी डूबने का भय रहता था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यानाथ की सरकार ने अपराधियों में खौफ बनाने और अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को खुली छूट दी और एक के बाद एक कई एनकाउंटर किए गए। सरकार का दावा रहा है कि अपराधियों के बीच एनकाउंटर का डर ऐसा समाया कि वो खुद अपनी बेल कैंसिल कराकर या तो जेल में आने लगे या फिर सरेंडर करने लगे। ऐसा हुआ भी है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हाल ही में एक के बाद एक अपराध की बड़ी वारदातों ने सरकार की एनकाउंटर नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर अपराधियों में एनकाउंटर और कानून का इतना ही डर है तो अपराध की बढ़ती ये घटनाएं किस बात की ओर इशारा कर रही हैं।

वारदातें जिनसे बढ़ी दहशत

वारदातें जिनसे बढ़ी दहशत

17 जुलाई, सोनभद्र: गुंडों-अपराधियों के एक संगठित गिरोह ने मासूम ग्रामीणों को घेरकर, खुलेआम गोलियां बरसाईं, जिसमें 10 ग्रामीणों की हत्या कर दी गई और तीस से ज्यादा लोग जख्मी हो गए।

17 जुलाई, संभल- कैदियों को ले जा रही है वैन के दो सिपाहियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और तीन कैदी फरार हो गए।

17 जुलाई बाराबंकी- मोटरसाइकिल पर सवाल दो बदमाशों ने चौथी कक्षा के एक छात्र को स्कूल जाते समय अगवा कर लिया।

17 जुलाई,लखनऊ- राजधानी में मिडलैंड हेल्थ केअर एंड रिसर्च सेंटर के मैनेजर विश्वजीत पुंडीर की हत्या कर दी गई।

16 जुलाई, फतेहपुर- फतेहपुर के गांव में गोकशी की वजह से तनाव पैदा हो गया और मदरसे में आगजनी की घटना हुई। पुलिस ने जैसे तैसे स्थिति पर काबू पाया।

15 जुलाई- प्रतापगढ़ में विहिप के जिला अध्यक्ष व वकील प्रणव मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि अयोध्या के कनकपुर गांव में स्थानीय सपा नेता अखिलेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

27 जुलाई, अमेठी- सेना के रिटायर्ड कैप्टन की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

रिकॉर्ड एनकाउंटर फिर भी लगाम नहीं

रिकॉर्ड एनकाउंटर फिर भी लगाम नहीं

इस महीने हुईं अपराध की ये खौफनाक वारदातें बताती हैं कि प्रदेश में एक बार फिर कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। प्रदेश में अपराधों पर काबू पाने के लिए योगी सरकार ने जो नीति अपनाई थी कि अपराधी या तो मारे जाएंगे या जेल में होंगे। इसी नीति पर चलते हुए मार्च 2017 से अब तक 3896 एनकाउंटर किए गए। इन एनकाउंटर में 76 अपराधी मारे गए और 1154 अपराधी जख्मी हुए जबकि 8904 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। एनकाउंटर की दहशत में 15170 अपराधियों ने अब तक सरेंडर किया है, इनमें से 406 एनएसए के तहत गिरफ्तार किए गए। इस दौरान पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए जबकि 642 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस बल की कमी

पुलिस बल की कमी

प्रदेश के डीजीपी का मानना है कि बढ़ते अपराधों की बड़ी वजह पब्लिक-पुलिस रेशियो का कम होना है। प्रदेश बहुत बड़ा है और उसके मुकाबले पुलिस बल की संख्या काफी कम है। इसके लिए प्रदेश में एक लाख सिपाहियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साफ है कि प्रदेश में अकेले एनकाउंटर के दम पर अपराधों पर काबू नहीं पाया जा सकता। सरकार को ना केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ानी होगी बल्कि पुलिस और पब्लिक के बीच के संबंध को भी सहज करना होगा ताकि अपराधियों के बारे में जनता खुलकर पुलिस को सूचनाएं दे सके।

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