बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारतीय नौसेना ने 21 दिनों तक की थी पाकिस्तानी सबमरीन की तलाश

नई दिल्ली। पुलवामा हमले के बाद भारत ने अपनी नौसेना को अभ्यासों से अलग कर लिया था और अपनी फ्लीट की परमाणु सबमरीन समेत कई पनडुब्बियों को पाकिस्तानी जल सीमा के नजदीक तैनात कर दिया गया था। भारत की ओर से नौसेना की सबमरीन की आक्रमक तैनाती से पाकिस्तान की इस बात का आभास हो गया था कि, जैश-ए-मोहम्मद के हमले में मारे गए 40 सीआरपीएफ जवानों की मौत का बदला लेने के लिए नौसेना का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि भारत ने इस हमले का बदला बालकोट में एयर स्ट्राइक करके लिया था।

अचानक गायब हो गई थी पाकिस्तान की सबसे एडवांस सबमरीन

अचानक गायब हो गई थी पाकिस्तान की सबसे एडवांस सबमरीन

सरकार के सीनियर सूत्र ने बताया कि, भारत लगातार पाकिस्तानी सेना की आवाजाही पर नज़र रख रहा था, लेकिन भारतीय वायु सेना (IAF) के बालाकोट में जैश आतंकवादी फैक्ट्री पर हमला करने के बाद पाकिस्तान की सबसे एडवांस मानी जाने वाली अगस्टा क्लास सबमरीन- पीएनएस साद, अपने जल क्षेत्र से गायब हो गई थी। लंबे समय तक पानी के भीतर रहने की क्षमता वाली इस सबमरीन के गायब होने के बाद भारतीय नेवी चिंता में पड़ गई थी।

पांच दिन में करांची से पहुंच सकती थी मुंबई

पांच दिन में करांची से पहुंच सकती थी मुंबई

सूत्रों ने बताया कि, पीएनएस साद जिस वक्त गायब हुई थी वह उस समय पाकिस्तान के शहर करांची के पास थी। वह वहां से तीन दिनों में गुजरात पहुंच सकती थी औऱ वेस्टन फ्लीट के मुख्यालय मुंबई पहुंचने में उसे पांच दिन का वक्त लगता। इस सबमरीन के गायब होने के बाद देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया था। लापता पाकिस्तानी पनडुब्बी को खोजने के लिए भारत ने पनडुब्बी रोधी युद्ध के विशेषज्ञ युद्धपोत और विमान को खोजी अभियान में लगाया था।

21 दिनों के बाद लापता सबमरीन का चला पता

21 दिनों के बाद लापता सबमरीन का चला पता

सूत्रों ने बताया कि, उन सभी क्षेत्रों में जहां यह सबमरीन दी गई समय सीमा में पहुंच सकती थी। भारतीय नौसेना ने इस इलाकों में व्यापक खोज की। सूत्रों के अनुसार, पी -8 आई को पनडुब्बी का पता लगाने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के तटीय इलाकों में खोज के लिए लगाया गया था। नौसेना द्वारा सभी एहतियाती उपाय किए गए थे। यहां तककि अगर पीएनएस साद ने भारतीय जल सीमा में प्रवेश करती है तो उसे सतह पर आने के लिए बाध्य करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई जा सके। यहां तक कि, परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र को भी पाकिस्तानी जल सीमा में एक आक्रामक मुद्रा में तैनात किया गया था और लापता पाकिस्तानी पनडुब्बी की तलाश जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। यही नहीं नौसेना ने स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को भी सर्च अभियान में शामिल किया था। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़े, भारतीय नौसेना ने पाकिस्तानी सबमरनी की खोज का दयारा और बढ़ा दिया। उसका पता लगाने के लिए उपग्रहों का भी उपयोग किया गया। सेना को पूरा विश्वास था कि पाकिस्तानियों ने इसे कहीं और छिपा रखा होगा। अंत में 21 दिनों के बाद पता चला कि, पनडुब्बी साद पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्से में मौजूद है।

 तनाव बढ़ने के तुरंत बाद, नौसेना ने 60 से अधिक युद्धपोतों को तैनात किया था

तनाव बढ़ने के तुरंत बाद, नौसेना ने 60 से अधिक युद्धपोतों को तैनात किया था

सूत्रों ने कहा कि, बालकोट हवाई हमले के बाद गुप्त क्षमता सुनिश्चित करने के लिए इसे छिपाने के लिए वहां भेजा गया था। सूत्रों ने कहा कि नौसेना अरब सागर, विशेष रूप से पाकिस्तानी जल की पूरी निगरानी कर रही है, और इस क्षेत्र में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों से अवगत है। तनाव बढ़ने के तुरंत बाद, नौसेना ने 60 से अधिक युद्धपोतों को तैनात किया था, जिसमें विमान वाहक आईएनएस विक्रमादित्य शामिल था।

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