Exclusive: छोटा भीम तो रोज देखते हैं अब देखें छोटा रावण
नयी दिल्ली (बवीता झा)। टेलीविजन पर छोटा भीम तो आप रोज़ देखते होंगे, अब बारी है छोटा रावण की। जी हां इस रावण के भी दस सिर होंगे और हाथ में तल्वार और तीर धनुष। ओहहहह.... ज्यादा कंफ्यूज मत हों यह रावण टीवी पर नहीं बल्कि मैदान में लाइव देखने को मिलेगा। वो भी दशहरे के दिन।
हर साल की तरह इस साल दशहरे के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी में कई जगहों पर रावण दहन का कार्यक्रम रखा गया है। दशहार के दिन पूरी दिल्ली में तकरीबन 5000 जगहों रावण का दहन किया जाएगा। अगर आप भी रावण और लंका दहन को देखने जाने वाले हैं, तो प्रयास जल्दी पहुंचने के प्रयास कीजियेगा। क्योंकि अगर आप भीड़ में सबसे पीछे होंगे तो आप सिर्फ आसमान में आतिशबाजी देख पायेंगे। आतिशबाजी लंका जलने से होगी, कुंभकरण दहन, मेगनाद या फिर रावण, यह गस करना कठिन होगा, क्योंकि भीड़ में दूर से आपको रावण नहीं दिखाई देगा।
यह सब इसलिये क्योंकि इस बार रावण का कद पिछले साल की तुलना में और छोटा रहने वाला है। जी हां इस बार रावण पर महंगाई की मार पड़ने लगी है। मंहगाई ने रावण की कमर तोड़ कर उसके कद को छोटा कर दिया है। जहां इसकी डिमांड घटी है तो वहीं इसे बनाने वाले कलाकारों को घाटे का डर सता रहा है। तस्वीरों के जरिए से हम आपको दिखाते है कि किस तरह से बढ़ती महंगाई की मार से रावण परेशान है।

महंगाई ने तोड़ी रावण की कमर
दिल्ली में रावण दहन के लिए अलग-अलग जगहों रावण, मेघनाघ और कुंभकरण के पुतलों का निर्माण किया जा रहा है। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के द्वारका केपास भी बिहार से आए कलाकारों का समूह दशहरा के लिए रावण निर्माण करने में जुटा है।

कैसे करें भरपाई
रावण बनाने वले ये कलाकात पुतलों को अंतिम रुप देने में जुटे हुए हैं। रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों को अंतिम रुप देने वाले कलाकारों का घाटे का डर सता रहा हैं।

पुलिसवाले भी मांगते हैं पैसा
बिहार से आए संतोष कुमार दो महीने से रावण के पुतले बनाने के लिए दिल्ली ए है। सड़क के किनारे ये टैंट लगाकर अपने ग्रुप से साथ रहते है और वहीं पुतले बनाने है, लेकिन संतोष कहते है कि उन्हें इसके लिए पुलिस वालों और कमेटी वालों को बार-बार पैसा देना पड़ता है।

क्यों छोटा हुआ रावण
बढ़ती महंगाई के कारण इस बार कलाकार छोटे रावण बनाने का ज्यादा तव्वजो दे रहे हैं। बड़े रावण की कीमत ज्यादा होने की वजह से लोग छोटे-छोटे रावण ज्यादा खरीद रहे हैं।

घट रही है मांग
रावण पर मंहगाई की ऐसी मार पड़ी की इस बार दिल्ली में उसकी मांग पर कटौती हो गई। ऐसे में रावण बनाने वाले बाबुलाल कहते हैं कि पिछली बार की तुलना में हमने इस बार कम संख्या में रावण बनाएं है क्योंकि इस बार मांग कम है।

नहीं मिल रही कीमत
सुरेश जो कि बिहार से आए है और पिछले दो महीनों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं इसी चिंता से ग्रस्त है कि इस बार मुनाफा कैसे कमाए। रावण बनाने में लगने वाली बांस, कागज, गोंद, रंग सब की कीमत बढ़ गई है और लोग उस हिसाब से कीमत देने को तैयार नहीं हैं।

लंबाई भी हुई कम
बॉवी भी बिहार से आए है दिल्ली में रावण के पुतले बनाने के लिए। वो पिछले 15 सालों से यहीं काम कर रहे हैं, लेकिन वो इस बार परेशान है क्योंकि इसबार रावण की कीमतें बढ़ गई है, लेकिन लोग उसे चुकाने के लिए तैयार नहीं हैं।

रावण पर मंहगाई की मार
पिछली बार रावण की कीमत 150 से 200 प्रति फुट के हिसाब से थी, लेकिन इस बार ये कीमत दोगुनी हो गई है। इस बार रावण की शुरुआती कीमत 350 रु प्रति फुट से शुरु होकर 500 रु. प्रति फुट तक हैं।

घट गई रावण की लंबाई
तिलकनगर के पास मेट्रो पीलर के नीचे आपको रावणों की लंबी कतार दिख जाएगी। यहां 5 फीट के रावण से लेकर 55 फीट तक का रावण का पुतला है।

मंहगाई की पड़ी मार
शंकर रावण वाले अशोक कहते है कि रावण के पुतले बनाने वाले हर सामान पर मंहगाई की मार पड़ी है। कीमतें आसमान छू रही है, लेकिन लागत के हिसाब से ग्राहक रावण के लिए उचित कीमत तक देने को तैयार नहीं है।












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