ये है पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के एग्रेसिव रवैये की असल वजह

बेंगलुरू। भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद से पाकिस्तान में सत्तासीन इमरान सरकार बौखलाई हुई है। पहले राजनयिक, फिर व्यापारिक, फिर परिवहनों को आवागमन पर प्रतिबंध लगाकर वह लगातार अपना गुस्सा निकाल रही है। मामले में भारत पर अंतर्राष्ट्रीय दवाब बढ़ाने के लिए उसने यूनाइटेड स्टेट से भी हस्तक्षेप करने की गुहार की. उनका चहेता पड़ोसी मुल्क चीन ने भी उनका साथ देने से मना कर दिया है, बावजूद इसके पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार एग्रेसिव रवैया अपनाए हुए हैं।

Imran khan

माना जा रहा है कि एक वर्ष बीतने के बाद भी पाकिस्तान की इमरान सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिसका खामियाजा जनता को हरेक मोर्च पर भुगतना पड़ रहा है। इमरान खान के सत्तासीन होने के बाद भी वहां की जनता आम जरूरत की चीजों की लगातर बढ़ रही कीमतों से त्रस्त है।

पिछले एक वर्ष से रोजाना इमरान सरकार को गाली दे रही है वहां की अवाम का विश्वास जीतने में अभी तक इमरान खान नाकाम रही हैं। वहीं, इमरान के नवा पाकिस्तान के शिगूफा भी हवाहवाई ही साबित हुआ, क्योंकि वहां की अवाम ने इमरान खान के नेतृत्व में एक मजबूत, भ्रष्टाचार और आतंकवाद मुक्त पाकिस्तान को सपना लोगों ने संजोया था, लेकिन इमरान खान के कार्यकाल घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है।

लेकिन महंगाई, भ्रष्टाचार और आंतकवाद से जूझ रही थी पाकिस्तानी अवाम को इमरान सरकार का नाकामी का तब और बड़ा झटका लगा जब उरी और पुलवामा की घटना के बाद हिंदुस्तान की मोदी सरकार ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक और एअर स्ट्राइक को अंजाम दे दिया। तब से इमरान सरकार पर आम पाकिस्तानी की उम्मीद भी खत्म हो गई है और अब भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीन लिए जाने से वह काफी नाराज चल रही है।

दरअसल, इमरान सरकार अपनी फजीहत छिपाने के लिए एक के बाद भारत पर प्रतिबंध थोपने को मजूबर है। ऐसा करके पीएम इमरान पाकिस्तानी अवाम को मुगालते में रखना चाहते हैं, लेकिन पहले से मंहगाई और भ्रष्टाचार से जूझ रही जनता ट्रेड प्रतिबंधों से होने वाली चौतरफा मंहगाई की मार को कितना झेल पाएगी यह समय ही बताएगा।

Modi-Imran khan

हालांकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के सियासी हथकंडे खुद उन पर और पाकिस्तान दोनों पर ही भारी पड़ गए हैं। भारत द्वारा जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन के लिए उठाए कदम का विरोध कर रहे पीएम इमरान को उनकी गुहार के बाद भी कोई कंधान नहीं मिल रहा है।

इमरान खान ने मामले को यूनाइटेड नेशन में उठाने की बात कही तो यूनाइटेड ने मामला द्विपक्षीय बताकर पल्ला झाड़ लिया। रूस राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले को उचित करार देकर पाकिस्तान को बेहद निराश कर दिया।

अमेरिका की ट्रंप सरकार ने भी इमरान सरकार की कोई मदद नहीं की और तो और पाकिस्तान के पक्के दोस्त कहे जाने वाले चीन ने भी खुद को मामले से किनारा कर लिया। पाकिस्तानी पीएम की गुहार के बाद अभी तक कोई इस्लामिक देश पाकिस्तान के साथ खड़े होने को अब तक तैयार नहीं हुआ है। इनमें सऊदी अरब, अफगानिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं,जिससे पाकिस्तान की सरकार पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है।

बढ़ती महंगाई से पहले से ही त्रस्त पाकिस्तानी अवाम की हालत दिन ब दिन खराब हो रही है और अब देखना होगा कि वह इमरान सरकार के प्रतिबंध शिगूफे को कब तक झेल पाती है, क्योंकि आर्थिक मोर्चे पर कंगाली के कगार पर खड़ी पाकिस्तानी सरकार भारत के साथ युद्ध में कूदने से तो रही।

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