NRC REPORT: 30 साल तक देश की सेवा करने वाले आर्मी ऑफिसर का नाम भी लिस्ट से गायब

गुवाहटी। असम पर नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट सोमवार को जारी हुआ है, जिसमें 40 लाख लोगों का नाम नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस लिस्ट इंडियन आर्मी के एक रिटायर्ड ऑफिसर का नाम भी गायब है। सेना के पूर्व ऑफिसर मोहम्मद अजमल हक ने देश के लिए 30 साल तक सेवा की है और सितंबर 2016 में वे जेसीओ (Junior Commissioned Officer) पद से रिटायर्ड हुए थे। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब पूर्व आर्मी ऑफिसर अजमल हक से उनकी नागरिकता पर सवाल उठे हैं। पिछले साल असम पुलिस ने हक को नोटिस भेजकर उनको अपनी नागिरकता साबित करने के लिए कहा था।

डॉक्यूमेंट जमा कराने के बाद भी नागरिकता पर उठे सवाल

डॉक्यूमेंट जमा कराने के बाद भी नागरिकता पर उठे सवाल

गुवाहटी से 50 किमी दूर चायगांव में अजमल हक का घर है, जहां वे अपने परिवार के साथ रहते हैं। इंग्लिश मैगजीन 'आउटलूक' से बात करते हुए हक ने कहा कि सभी डॉक्यूमेंट जमा कराने के बाद भी उनका नाम एनआरसी की लिस्ट में नही है। 50 वर्षीय हक ने कहा कि इस लिस्ट में उनके बेटे और बेटी का नाम भी गायब है, जो कि उन्हें असम में एक अवैध घुसपैठिए के रूप में देखा जा रहा है।

इस तरह के अपमान की उम्मीद नहीं थी...

इस तरह के अपमान की उम्मीद नहीं थी...

इंग्लिश मैगजीन से बात करते हुए पूर्व आर्मी ऑफिसर ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं कर सकता। हक ने कहा कि उन्होंने 30 साल तक देश की सेवा के बाद इस तरह के अपमान की उम्मीद नहीं की थी। हालांकि, उन्हें अपने इस प्रकार के बहिष्कार के खिलाफ आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति दी जाएगी। एनआरसी की अंतिम लिस्ट दिसंबर में आएगी।

पहले भी हो चुके हैं परेशान

पहले भी हो चुके हैं परेशान

पूर्व सेना अधिकारी हक और उनके परिवार की नागरिकता को लेकर असम के सरकारी अधिकारी पहले भी उनके खिलाफ नोटिस जारी कर चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में स्टेट पुलिस ने हक को नोटिस भेजकर उनको अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा था। हक ने कहा था कि पुलिस ने बिना किसी तथ्यों के आधार पर उन्हें नोटिस में 1971 में बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से एंट्री करने का आरोप लगाया था। वहीं, 2012 में उनके वोटर आईडी पर भी सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा, 2012 में पूर्व सेना अधिकारी की पत्नी को भी उनको अपनी नागरिकता साबित करने के लिए ट्रिब्यूनल ने तलब किया था।

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