शादी के बाद पति का उपनाम जोड़ना अनावश्यक : सर्वे
नई दिल्ली| भारतीय परंपरा विवाह के बाद महिलाओं को पति के उपनाम को धारण करने के लिए कहता है। लेकिन एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि भारतीय महिलाएं इसे अनावश्यक मानती हैं। ऑनलाइन वैवाहिक वेबसाइट शादी डॉट कॉम द्वारा यह सर्वेक्षण शादी में समानता को लेकर महिला और पुरुष क्या समझते हैं, समझने के लिए कराया गया।

65.7 फीसदी महिलाओं ने माना कि उपनाम बदलना अनावश्यक है, जबकि 34.3 फीसदी महिलाओं ने उपनाम बदलने से कोई फर्क नहीं पड़ने की बात कही। शादी डॉट कॉम के मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) गौरव रक्षित ने कहा, "शादी डॉट कॉम का मानना है कि विवाह एक जीवन भर का बंधन है, जिसमें पति और पत्नी दोनों की बराबर की भागीदारी होती है। दोनों को ही हमेशा एक दूसरे का आदर और समर्थन करना चाहिए।"
उपनाम के इस सवाल को जब भारतीय पुरुषों से पूछा गया तो 46.1 फीसदी ने हां, 24.6 फीसदी ने नहीं, जबकि 29.3 फीसदी ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और इसका निर्णय महिलाएं खुद ले सकती हैं। जब महिलाओं से शादी के बाद मां-बाप का घर छोड़कर पति के घर जाने के बारे में सवाल किया गया, तो 67.9 फीसदी महिलाओं ने इसे अनुचित, जबकि 32.1 फीसदी ने कहा कि ऐसा करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं।
सर्वेक्षण के दौरान 72.1 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्हें शादी के बाद भी आत्मनिर्भर होना चाहिए, जबकि 61.4 फीसदी पुरुष इस बात से सहमत हुए कि महिलाओं को शादी के बाद आत्मनिर्भर होना चाहिए।












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