Aditya L1 अपने अंतिम और अहम चरण में पहुंचा, इसरो प्रमुख सोमनाथ ने स्पेसक्राफ्ट को लेकर दिया बड़ा अपडेट
ISRO Aditya-L1 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मिशन चंद्रयान 3 की सफलता के बाद अपने पहले सूर्य मिशन में किला फतेह करने वाला है। इसरो का स्पेसक्राफ्ट आदित्य-एल1 अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की कगार पर है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने इस बात का खुलासा किया है।

इसरो अध्यक्ष सोमनाथ ने बताया कि भारत का पहला सूर्य अंतरिक्षयान आदित्य एल 1 अंतरिक्ष में 15 लाख किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद 6 जनवरी, 2024 को अपने गंतव्य, एल1 बिंदु पर पहुंचने वाला है। याद रहे एल1 में प्रवेश आदित्य का प्रवेश मिशन का बहुत ही महत्वपूर्व चरण हैं। इसरो प्रमुख ने कहा आदित्य-एल1 का एल1 पॉइंट इंसर्शन 6 जनवरी, 2024 को किया जाएगा लेकिन समय अभी तय नहीं किया गया है।
क्या है L1 या लैग्रेंज प्वाइंट 1
बता दें एल1 या लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) अंतरिक्ष में एक रणनीतिक स्थान है जहां पृथ्वी और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति एक दूसरे को संतुलित करती है, जिससे अंतरिक्ष यान को दोनों पिंडों के सापेक्ष स्थिर स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिलती है।
भारत का स्पेसक्राफ्ट आदित्य एल 1 पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वकर्षण लैग्रेंज प्वाइंट 1 (एल1) के आसपास हेलो कक्षा में एक जटिल सम्मिलन करने के लिए तैयार है, आदित्य-एल1 सूर्य को बेहतर ढंग से समझने के लिए एल 1 प्वाइंट पर स्थापित होगा।
2 सितंबर को इसरो ने किया था लॉन्च
बता दें 2 सितंबर, 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आदित्य-एल1 को पीएसएलवी-सी57 रॉकेट पर लॉन्च किया गया था। आदित्य-एल1 सूर्य को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी यात्रा पर निकला था।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से सफलतापूर्वक बच गया
30 सितंबर को अदित्य एन 1 पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से सफलतापूर्वक बच गया और अपने प्रक्षेप पथ को सही करने के लिए कई युद्ध लड़े। एल1 बिंदु की ओर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित होने से पहले आदित्य एल 1 को पृथ्वी से जुड़ी चार कक्षाओं की गतिविधियों की श्रृंखला से गुजरना पड़ा। स्पेसक्राफ्ट हेलो कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करने के लिए अपने वेग और प्रक्षेप पथ को बनाए रखता है।
आदित्य-L1 के मिशन का उद्देश्य
आदित्य-एल1 के मिशन के उद्देश्य सूर्य के कोरोना, उसके ताप तंत्र और कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) की गतिशीलता के रहस्यों को उजागर करना है। इन घटनाओं के दूरगामी प्रभाव हैं, न केवल सूर्य के बारे में हमारी समझ को बढ़ाएगा बल्कि अंतरिक्ष मौसम पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में भी बताएगा, जो पृथ्वी पर उपग्रह संचालन और संचार को प्रभावित कर सकता है।
आदित्य L1 क्या करेगा?
बता दें अंतरिक्ष के एल 1 से सूर्य का निर्बाध दृश्य दिखता है जिससे सौर वातावरण,तापमान सौर चुंबकीय तूफान और पृथ्वी के पर्यावरण पर उनके प्रभाव की स्टडी करने की अनुमति मिलती है। आदित्य एल वन यहां से सूर्य की विभिन्न घटनाओं जैसे मास इजेक्शन (सीएमई) और इंटरप्लेनेटरी चुंबकीय क्षेत्र को मापेगा। जो केवल भारत ही नहीं विश्व भर के वैज्ञानिकों के लिए अहम डेटा प्रदान करेगा।
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