पानीपत ब्लास्ट मामले में आरोपी आतंकी अब्दुल करीम टुंडा बरी
सबूतों के अभाव में एक अहम ब्लास्ट केस आतंकी टुंडा बरी। कैप्सूल बम बनाने में माहिर टुंडा के खिलाफ देश में कई मामले दर्ज।
पानीपत। खूंखार आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को सबूतों और गवाहों के अभाव में पानीपत बस स्टैंड धमाका केस में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बरी कर दिया है। टुंडा, लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी संगठन से जुड़ा रहा है और उस पर भारत में 40 से ज्यादा बम धमाके करने के आरोप हैं।

18 साल पहले हुआ था पानीपत बम ब्लास्ट
पानीपत में 1 फरवरी 1997 को बस स्टैंड के पास एक प्राइवेट बस में धमाका हुआ था। इस धमाके में करीब 13 लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे। इसमें से एक की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट केस में अब्दुल करीम टुंडा को आरोपी बनाया गया था।
सोनीपत में दोहरे बम धमाके का आरोप
अब्दुल करीम टुंडा को करनाल जेल भेज दिया गया है। उस पर सोनीपत में 1996 में हुए दो बम धमाकों के सिलसिले में मुकदमा चल रहा है। वहां उसकी कोर्ट में पेशी होगी।
करनाल जेल में हुआ था हमला
कोर्ट में पेश किए जाने से एक दिन पहले करनाल जेल में दो कैदियों ने टुंडा पर जानलेवा हमला किया था और गला दबाकर उसे मारने की कोशिश की थी। सुरक्षा गार्ड ने टुंडा की जान बचाई।
बम बनाने में माहिर है टुंडा
अब्दुल करीब टुंडा कैप्सूल बम बनाने में माहिर है। टुंडा के दाऊद इब्राहिम, हाफिज सईद, खालिस्तानी आतंकी कश्मीरा सिंह, बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह जैसे खूंखार और इंटरनेशनल आतंकियों से संबंधों की बात सामने आई है।
अब्दुल करीम के नाम के साथ कैसे जुड़ा टुंडा
बताया जाता है कि बांग्लादेश में बम बनाने के दौरान ब्लास्ट हो गया जिसमें उसका बायां हाथ उड़ गया। इसके बाद उसे टुंडा के नाम से लोग बुलाने लगे। वह देसी तकनीक से बम बनाना सिखाता था। लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी संगठनों में उसकी भारी डिमांड थी। वह 1985 में आईएसआई से ट्रेनिंग ले चुका था।
पिलखुवा का रहनेवाला है टुंडा
टुंडा का जन्म पुरानी दिल्ली में 1943 में हुआ था। बाद में उसके पिता ने पुरानी दिल्ली छोड़ दी और पिलखुवा में जाकर बस गए। बताया जाता है कि टुंडा की हरकतों की वजह से उनको दिल्ली छोड़नी पड़ी। दिल्ली में उस पर पहला केस चोरी का दर्ज हुआ था। दिल्ली, गाजियाबाद समेत देश के कई इलाकों में उस पर कई केस दर्ज हैं।












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