OPINION: जानिए खास वर्ग के मतदाता क्यों करते हैं 'AAP' को वोट?
OPINION: दिल्ली की सियासी पीच पर हिट होने के लिए राजनीतिक पार्टियां जोर-आजमाइश कर रही हैं। अगले महीने पांच फ़रवरी को मतदान होगा। नतीजे आठ फ़रवरी को आएंगे। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस के बीच दिलचस्प सियासी मुकाबला हो रहा है। इस बीच एक सवाल है, जो सबके मन में घूम रहा है कि 'AAP' के लिए दिल्ली में ऐसे कौन से वोटर्स हैं, जो संजीवनी बने हुए हैं।
अक्सर, जब भी दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार का जिक्र होता है, तो कई बातों का ख्याल आता है। जिसमें सरकारी स्कूलों का कायाकल्प, मोहल्ला क्लीनिक, 200 यूनिट फ्री बिजली, महिलाओं के लिए DTC बसों में फ्री यात्रा शामिल हैं। दिल्ली में इन वर्गों के वोटर्स के बीच जनकल्याणकारी योजनाओं के बदौलत आम आदमी पार्टी की सरकार ने सुर्खियां भी खूब बटोरी हैं। ये वो वोटर्स हैं जिसकी वजह से अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली आप को एक ऊर्जा का एहसास होता है।

देश के अन्य राज्यों में जब लोगों से बातचीत करेंगे, तो उसमें सीधे तौर पर एक कैटेगरी है मतदाताओं का, जो Welfarism स्कीम्स का लाभ उठा रहे हैं। ये मतदाता, कहीं भी गली मुहल्ले और गांव-कस्बों में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चलाए जा रहे जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र जरूर करते हैं। जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन योजना, किसान सम्मान निधि योजना, गरीब कल्याण अन्न योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, सुरक्षा बीमा योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। ठीक इसी प्रकार दिल्ली में भी मतदाताओं का एक खास वर्ग है, जो आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठा रही है।
राजधानी दिल्ली में बिहार-यूपी से ताल्लुकात रखने वाले मतदाताओं की संख्या करीब 20 प्रतिशत है, जो किसी अन्य समुदाय की तुलना में सबसे ज्यादा है। दिल्ली में बिहार-यूपी से आने वाले मतदाता करीब 29 सीटों पर जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं। दिल्ली की उत्तम नगर, किराड़ी, बुरारी, संगम विहार, त्रिलोकपुरी और समयपुर बादली जैसी सीटों पर पूर्वांचली मतदाता ही एक्स फैक्टर हैं। ये वो मतदाता हैं, जो दिल्ली मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इन वोटर्स के बीच AAP की अच्छी पैठ है।
इस प्रकार दशकों से दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी का वर्चस्व आम लोगों के लिए दूरदर्शी योजनाओं का परिणाम है। देखना यह है कि आप सरकार अपने सियासी वर्चस्व को बचाए रखने में कहां तक सफल होती है?












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