कांग्रेस के संग मिलकर दिल्ली को जर्मनी बनायेंगे अरविंद केजरीवाल!

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली भाजपा ने विपक्ष में बैठने का निर्णय लिया है तो कांग्रेस से बिना शर्त समर्थन मिलने के बाद अब दूसरे नंबर पर सर्वाधिक सीटें पाने वाली आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए अपने रूख में नरमी के संकेत दिये हैं। लोकतंत्र में कई बार ऐसी स्थिति आती है कि किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, ऐसे में दोबारा चुनाव ही एक विकल्प होता है लेकिन दोबारा चुनाव होने तक प्रशासन में अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती है।
राजनीतिक पार्टियों से उम्मीद की जाती है कि वह वैचारिक मतभेद भुलाकर राष्ट्रहित ध्यान में रखे और जनता को एक बेहतर प्रशासन उपलब्ध करवायें। खंडित जनादेश का एक उदाहरण 22 सितंबर 2013 को जर्मनी चुनाव परिणामों में भी देखने को आया। जहां की सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला, वहीं उनकी प्रमुख सहयोगी पार्टी लिबरल डेमोक्रेट को पांच फीसदी से भी कम वोट मिले जिससे इसे संसद से हटना पड़ा। इसके अलावा जर्मनी की वामपंथी विचारधारा और प्रमुख विपक्षी पार्टी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी लेकिन उसकी सहयोगी ग्रीन पार्टी को गठबंधन के लिए जरूरी सीटें भी नहीं मिली।
सरकार बनाने के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी में दो फाड़
दोबारा चुनाव और उससे होने वाले खर्च से बचने के लिए एंजेला मार्केल की कंजर्वेटिव पार्टी ने अपनी 'दक्षिणपंथी विचारधारा' के बावजूद 'वामपंथी विचारधारा वाली' सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन के लिए बातचीत की। बातचीत की प्रक्रिया दो माह तक चली, इस दौरान दोनों पार्टियों ने मिलकर 160 पेज का एक दस्तावेज तैयार किया, जिसे वैधानिक रूप दिया गया, जिससे कि कोई अपने वादों से न मुकर सके और सरकार बनाई गयी।
हम आपको बता दें कि इक्नॉमिक टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि अगले सप्ताह ही केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायेंगे। यदि ऐसा हुआ तो केजरीवाल ही उस सरकार में मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि सरकार की उम्र कितनी होगी, यह तो कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन हां उसका जीवन शर्तों पर आधारित होगा।
अखबार से बातचीत में कहा कि जनता चाहती है कि वो सरकार बनायें, लेकिन एक प्रभावी शासन प्रदान करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। हालांकि केजरीवाल ने यह भी माना कि कांग्रेस के साथ सरकार बनाने के मुद्दे को लेकर पार्टी के अंदर दो फाड़ हो चुका है। खैर केजरीवाल सरकार बनायेंगे या नहीं यह रविवार की शाम तक साफ हो जायेगा, क्योंकि जनता के जवाब उन्हें बहुत तेजी से मिल रहे हैं। अब तक के रुझानों की बात करें तो 75 फीसदी जनता चाहती है कि केजरीवाल दिल्ली में सरकार बनायें, भले ही वो कांग्रेस के समर्थन से क्यों न बने।
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