AAP Election Surprise: हरियाणा में आप का नहीं खुला खाता, लेकिन कश्मीर में कर दिया कमाल
AAP Election Surprise: आम आदमी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की डोडा विधानसभा सीट जीतकर इतिहास रच दिया है। पार्टी के उम्मीदवार मेहराज मलिक ने भाजपा के गजाय सिंह राणा को 4,538 वोटों से हराते हुए आप को जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा में जगह दिलाई है। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार खालिद नजीब सुहरवर्दी को 9,894 वोटों से पराजित किया। जो इस जीत को और भी खास बनाता है। जम्मू-कश्मीर में एक दशक बाद हो रहे विधानसभा चुनावों में यह जीत आप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
डोडा सीट पर 13 राउंड की मतगणना के बाद मेहराज मलिक को विजेता घोषित किया गया। इस सीट पर 2014 के चुनाव में भाजपा के शक्ति राज ने जीत हासिल की थी। लेकिन यह सीट ऐतिहासिक रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच अदल-बदल होती रही है। 1962 के पहले चुनाव से ही यह सीट इन दोनों दलों के हाथों में रही थी।

जम्मू-कश्मीर में आप की ऐतिहासिक जीत के बावजूद हरियाणा में पार्टी के लिए निराशाजनक नतीजे सामने आए हैं। हरियाणा को आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल का गृह राज्य माना जाता है। यहां पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल पाई है। यह परिणाम पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर तब जब दिल्ली विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों बाद होने वाले हैं।
हरियाणा में आप की यह हार इसलिए भी अहम है। क्योंकि पार्टी कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के समझौते पर सहमति नहीं बना सकी। जबकि आप और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। हरियाणा में दोनों दलों के बीच मतभेद रहे। राहुल गांधी द्वारा बार-बार विपक्षी एकता की बात कहे जाने के बावजूद राज्य के नेताओं ने समझौते से इनकार कर दिया। जिससे गठबंधन नहीं हो पाया।
जम्मू-कश्मीर में आप की जीत कई लोगों के लिए चौंकाने वाली है। क्योंकि पार्टी ने वहां स्थानीय निकाय चुनावों में भी दिसंबर 2020 में मेहराज मलिक की जीत के साथ अपनी पहली बड़ी सफलता हासिल की थी। अब इस विधानसभा चुनाव में डोडा सीट जीतकर आप ने यह साबित कर दिया है कि वह राज्य की राजनीतिक में मजबूती से अपनी जगह बना रही है।
हरियाणा में हार और जम्मू-कश्मीर में जीत ने आप के चुनावी सफर में एक दिलचस्प मोड़ ला दिया है। जम्मू-कश्मीर में पार्टी की जीत जहां एक ऐतिहासिक सफलता है। वहीं हरियाणा में पार्टी का सूपड़ा साफ होना आगामी दिल्ली चुनावों के लिए पार्टी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। दोनों ही राज्यों में मिली भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया ने पार्टी के नेतृत्व के सामने नई चुनौतियां और संभावनाएं पेश की है।












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