राहुल, मुलायम जैसे दिग्गजों की राह कठिन करेंगे आप प्रत्याशी

आप ने रविवार को देश के विभिन्न राज्यों की 20 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की जिसमें उत्तर प्रदेश की मैनपुरी सीट पर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बाबा हरदेव सिंह, बागपत से रालोद प्रमुख अजित सिंह के खिलाफ वकील रहे सोमेंद्र ढाका, अमेठी में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ शिक्षक एवं कवि कुमार विश्वास, फरुखाबाद में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता रहे मुकुल त्रिपाठी के अलावा सहारनपुर सीट पर किसान यूनियन से जुड़े रहे योगेश दहिया और मुरादाबाद सीट पर खालिद परवेज को उतारा।
आप के अवध प्रांत की संयोजक अरुणा सिंह कहती है कि जिन लोगों को पार्टी ने टिकट दिया है कि वे आम जनता से जुड़े लोग हैं और काफी समय से जनता की सेवा करते आ रहे हैं। चुनाव में ये लोग जनता के मुद्दों को उठाएंगे। हमें भरोसा है कि इन्हें जनसमर्थन मिलेगा।
आम जनता से जुड़े लोग हैं आप के प्रत्याशी
सिंह कहती है कि मुलायम, सलमान, राहुल, अजित जैसे दिग्गज नेताओं के संसदीय क्षेत्रों में जाकर देखिए बिजली, पानी और सड़क का बुरा हाल है। जनता इनसे हिसाब मांगेंगी। आप के उम्मीदवार तो बस एक माध्यम बनेंगे।
जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी, सलमान खुर्शीद, मुलायम सिंह और अजित सिंह जैसे स्थापित नेताओं को आप उम्मीदवार टक्कर दे सकते हैं। क्योंकि इन दिग्गज नेताओं के खिलाफ हर दल से अधिकतर कमजोर उम्मीदवार मैदान में उतारे जाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक अल्का पांडे कहती हैं कि आप के उम्मीदवार इन दिग्गज नेताओं को चुनाव में टक्कर देकर इनकी जीत की राह थोड़ी मुश्किल कर सकते हैं। क्योंकि राहुल और मुलायम जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ विपक्षी दल अपेक्षाकृत कमजोर उम्मीदवार उतारते हैं। इसका एक कारण ये होता है कि कोई स्थापित नेता इनके खिलाफ लड़कर हारने का खतरा मोल नहीं लेना चाहता। ऐसे में मुख्य विपक्षी उम्मीदवार की जगह खाली रहती है, जो कड़ी टक्कर दे सके।
वहीं सोनभद्र, मिर्जापुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, हाथरस, इटावा, श्रावस्ती, सलेमपुर जैसी सीटों पर जहां पार्टियों के शीर्ष नेताओं के बजाय पार्टी के स्थानीय नेता चुनाव लड़ते हैं। उन सीटों पर आप के उम्मीदवार लड़ाई में रहेंगे और उन्हें सफलता मिलेगी इसकी संभावना कम है क्योंकि इन सीटों पर जातिवाद का बोलबाला रहता है।
राजनीतिक विश्लेषक आऱ पी़ सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की राजनीति जात पात में इस कदर जकड़ी है कि यहां राजनीतिक दलों को उम्मीदवार संबंधित सीट के जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर उतारने पड़ते हैं। चुनाव में मतदाता उम्मीदवार की जाति और राजनीतिक दल को देखकर वोट देते हैं। विकास व बाकी अन्य मुद्दे गौण हो जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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