बेंगलुरू: आधार की मदद से मानसिक रूप से बीमार 16 बच्चे घर लौटे
बेंगलुरू। बेंगलुरू में आधार की मदद से मानसिक रूप से बीमार 16 बच्चों को 2017 से अब तक उनके घर भेजा गया है। देशभर से भटक कर आए ये बच्चे अलग-अलग एनजीओ और दूसरे सरकारी आश्रय गृहों में रह रहे थे, जिनके परिवारों का उनके आधार की मदद से पता निकाला गया और उन्हें परिवार के पास भेजा गया। बेंगलुरु के एक एनजीओ को लावारिस हालत में कई लड़के रेलवे स्टेशन पर मिले। जिन्हें बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित शेल्टर होम में रखवाया गया। इसके बाद उनका पंजीकरण आधार से करवाया गया जिससे गुमशुदा लड़कों के परिजनों को ट्रेस करने में सहायता मिली।

टीओआई की खबर के मुताबिक, 17 साल का अरुण आधार की मदद के चलते तीन महीने बाद बेंगलुरू में अपने परिजनों से मिल सका। मध्य प्रदेश के दामोह से भटककर बेंगलुरू पहुंचे अरुण को यहां शेल्टर होम में रखा गया था, तब वहां उसके परिजनों को खोजने के लिए आधार से रजिस्ट्रेशन करवाया गया। जिसके बाद दमोह में उसके माता-पिता के संपर्क किया गया। अरुण के अलावा 15 और बच्चों को आधार की मदद से परिजनों से मिलाया गया है। इसमें ओडिशा और दूसरे राज्यों से आए बच्चें शामिल हैं।
सरकारी शेल्टर होम के अधीक्षक आर नागारत्ना ने बताया कि मानसिक रूप से विक्षिप्त गुमशुदा बच्चों का आधार पंजीकरण करवाना शुरू किया। ऐसे में कई बच्चे ऐसे मिले जिनका पंजीकरण पहले हो चुका था। इसके बाद शेल्टर होम ने आधार के अधिकारियों से संपर्क किया और उन बच्चों के फिंगर प्रिंट लेकर बच्चों के घर का पता खोजा। इसी तरह परिजनों से मिले अरुण के पिता ने बताया कि वो अप्रैल में एक विवाह समारोह में गए थे तभी वह ट्रेन से गायब हो गया।
शेल्टर होम का कामकाज देख रहे अधिकारियों ने बताया है कि यहां 12 से 21 उम्र के 72 बच्चे हैं है। मानसिक रूप से बीमार ये बच्चे घर जाने को तो कहते हैं लेकिन ये नहीं बता पाते कि वो कहां से आए हैं। ऐसे में जिन बच्चों का आधार रजिस्ट्रेशन है, उनका घर ढूंढ़ने में आसानी हो जाती है।












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