इस कहानी को पढ़कर आप भूल से भी दया नहीं करेंगे भिखारियों पर

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यह दास्तां सीतापुर के 18 वर्षीय नेत्रहीन व अपाहिज रमेश की है, जो पिछले चार वर्षो से 80 वर्षीय कमला नामक वृद्धा के चंगुल में फंसकर भीख मांगने का काम कर रहा था। रमेश की बातों पर यकीन करें तो उसे प्रतिदिन छह हजार रुपये का टारगेट दिया जाता था। इससे कम रकम लाने पर बदले में उसे मिलती थी नमक की एक सूखी रोटी। भीख मांगने में ना-नुकुर करने पर तेज आवाज में गाने बजाकर वृद्धा अपने नातियों से उसकी पिटाई कराती थी। रमेश के अनुसार, उसे बाकायदा भीख मांगने गुर भी बताए जाते थे।
नेत्रहीन रमेश सीतापुर में अपनी मां शर्मिता और भाई कमलेश व प्रकाश के साथ रहता था। वर्ष 2010 में सीतापुर में रहने वाले तीन पड़ोसी राम अवतार, विपिन और टिंकू नौकरी लगवाने के बहाने से उसे लेकर आ गए थे। तीनों ने उसे लाकर नया गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया था। वहीं, रेलवे स्टेशन के पास झुग्गी में रहने वाली वृद्धा कमला की उस पर नजर पड़ी और आश्रय दिया। बाद में रमेश से भीख मंगवाने का धंधा शुरू कर दिया।
रमेश के अपहरण का मुकदमा सीतापुर में दर्ज हैं। मामले में तीन लोग नामजद हैं। आरोपी जेल जा चुके हैं। इस संबंध में सीतापुर पुलिस को सूचित कर दिया गया है। वहां से पुलिस गाजियाबाद के लिए रवाना हो गई है। अब सीतापुर पुलिस ही आगे की कार्रवाई करेगी। ऐसे मामले यह साबित करते हैं कि किस तरह देश में लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ की जाती है।












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