यमराज का अनोखा मंदिर जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते

बेंगलूरू। दीपावली के एक दिन पहले से यमराज की पूजा अर्चना की जाती है। नरक चतुर्दशी के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। यह त्योहार दक्षिण भारत में ज्यादा प्रचलित बताया जाता है। दरअसल, इस दिन यमराज की पूजा करने वाले परिवार में कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। धर्म के जानकार मानते हैं कि मरने के बाद एक न एक दिन मानव को यमराज के पास जाना ही होता है।

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लेकिन क्या आपको पता है कि आप यमराज तक आप जीवित रहकर भी पहुंच सकते हैं। मातलब यह है कि भगवान यमराज के नाम से एक मंदिर है। जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। कहा जाता है कि उसमें बहुत पुरानी प्रथाएं आज भी कायम है। हिंदी दैनिक दैनिक जागण की एक रिपोर्ट के मुताबिक यमराज का यह प्रचलित मंदिर दिल्ली से पांच सौ किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

दिल्ली के पांच सौ किलो मीटर दूर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान पर यह मंदिर स्थित है। यहां अनोखी मान्यताएं हैं।

लेकिन आज भी कई लोग इस मंदिर में प्रवेश करने से घबराते हैं। बताया जाता है कि इश मंदिर में प्रवेश करने का साहस बहुत कम ही भक्त उठा पाते हैं। अधिकतर लोग मंदिर के बाहर से ही प्रणाम करके चले जाते हैं। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में धर्मराज यानी मृत्यु के देवता यमराज रहते हैं।

जानकारी के मुताबिक यह इकलौता मंदिर है जो भगवान यमराज को समर्पित है। इस मंदिर में कमरा है। कहा जाता है कि इस कमरे में चित्रगुप्त रहते हैं। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो की जानकारियां अपने पास रखते हैं।

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