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आर्मी ऑफिसर के एक थप्‍पड़ पर ही जैश सरगना अजहर ने उगल दिए थे पाकिस्‍तान के सारे राज

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    Pulwama : Masood Azhar ने Indian Army के एक थप्पड़ पर भी उगले थे Pakistan के राज | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर आज भारत के लिए गले की हड्डी बन गया है। एक समय ऐसा था जब इस आतंकी को हैंडल करना सेना और पुलिस के लिए बहुत ही आसाना था। 90 के दशक में मसूद अजहर का हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई थी। एक पूर्व पुलिस अधिकारी की मानें तो हिरासत में दौरान जब एक इंडियन आर्मी आफिसर ने अजहर को थप्‍पड़ रसीद किया तो वह पूरी तरह से कांप उठा था। मसूद अजहर 14 फरवरी को जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद फिर से खबरों में है। सीआरपीएफ कॉन्‍वॉय पर हुए इस आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए हैं।

    एक थप्‍पड़ पर सच सामने

    एक थप्‍पड़ पर सच सामने

    सिक्किम पुलिस के पूर्व डीआईजी रहे अविनाश मोहानाने का कई बार मसूद अजहर से आमना-सामना हुआ। उन्‍होंने साल 1994 में इस खतरनाक आतंकी को हिरासत में लिया था। डीआईजी मोहानाने को याद है कि कैसे पूछताछ के दौरान जब एक आर्मी ऑफिसर ने मसूद अजहर को एक थप्‍पड़ मारा तो उसने डर के मारे पल भर में सारी जानकारियां सामने लाकर रख दी थीं। इस थप्‍पड़ के बाद अजहर ने अपनी गतिविधियों से जुड़ी एक-एक खबर बताई। फरवरी 1994 में अजहर को दक्षिण कश्‍मीर के अनंतनाग से गिरफ्तार किया गया था। पुर्तगाली पासपोर्ट के दम पर अजहर बांग्‍लादेश के रास्‍ते भारत में दाखिल हुआ था।

    थप्‍पड़ ने किया काम आसान

    थप्‍पड़ ने किया काम आसान

    अजहर जिस समय हिरासत में था उस समय इंटेलीजेंस एजेंसियों को उससे जानकारी हासिल करने में ज्‍यादा मशक्‍कत नहीं करनी पड़ी थी। एक थप्‍पड़ ने एजेंसियों का काम आसान कर दिया था। इस थप्‍पड़ के बाद अजहर ने पाकिस्‍तान में आतंकी संगठनों के काम करने के तरीकों के बारे में गहनता से जानकारी दी थी। मोहानाने कई बार अजहर से पूछताछ कर चुके हैं और उन्‍हें इंटेलीजेंस ब्‍यूरो (आईबी) के साथ दो दशकों तक काम करने का अच्‍छा खासा अनुभव है। मोहानाने साल 1985 के बैस के आईपीएस आफिसर हैं और अजहर की गिरफ्तारी के समय वह आईबी की कश्‍मीर डेस्‍क का जिम्‍मा संभाल रहे थे।

    अहम थीं अजहर की दी हुई हर जानकारी

    अहम थीं अजहर की दी हुई हर जानकारी

    मसूद अजहर को साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी-814 की हाइजैकिंग के बाद रिहा किया गया था। अपनी रिहाई के बाद अजहर ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया जिसमें संसद पर हुआ आतंकी हमले समेत पठानकोट स्थित इंडियन एयरफोर्स के बेस और जम्‍मू कश्‍मीर में आर्मी कैंप्‍स पर हुए आतंकी हमले शामिल हैं। हिरासत के दौरान अजहर ने पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठनों में आतंकियों की भर्ती कैसे होती है इस बारे में बताया था। मोहनाने के मुताबिक अजहर की ओर से मुहैया कराई गई हर डिटेल इसलिस भी काफी अहम थी क्‍योंकि भारत में एजेंसियों को आईएसआई की तरफ से जारी प्रॉक्‍सी वॉर की रणनीति समझ में ही नहीं आ रही थी।

    अजहर क्‍यों आया था कश्‍मीर

    अजहर क्‍यों आया था कश्‍मीर

    मोहनाने ने बताया कई बार ऐसे मौके थे जब उन्‍होंने अजहर से कोट बालवाल जेल में मुलाकात की और घंटों तक उससे पूछताछ होती थी। उनकी मानें तो अजहर पर किसी तरह का कोई कड़ा तरीका अपनाना ही नहीं पड़ा क्‍योंकि एक थप्‍पड़ के बाद वह आसानी से सारी जानकारियां देता गया। अजहर इस समय अपनी उम्र के 50वें पड़ाव पर है। मसूद अजहर ने भारतीय एजेंसियों को कई अहम जानकारियां दी थीं। उसकी दी हुई डिटेल्‍स में उसने बताया था कि कैसे अफगानिस्‍तान के आतंकियों को कश्‍मीर घाटी में पहुंचाया जा रहा। उसने यह भी बताया था कि कैसे हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (हम) और हरकत-उल-जेहाद (हूजी) आतंकी संगठनों ने आपस में हाथ मिला लिए और फिर ये संगठन हरकत-उल-अंसार में तब्‍दील हो गए थे। हम और हूजी के साथ मीटिंग करके एक समान नीति अपनाने पर बातचीत की थी।

    'आईएसआई मुझे पाक लाकर रहेगी'

    'आईएसआई मुझे पाक लाकर रहेगी'

    अजहर ने बताया था, 'मैं पुर्तगाली पासपोर्ट के आधार पर यहां पर यह सुनिश्चित करने आया था कि हम और हूजी एक साथ कश्‍मीर घाटी में काम करें। मेरे लिए एलओसी पार करके कश्‍मीर आना बहुत मुश्किल था।' मोहानाने को याद है कि अजहर बहुत ही बड़बोला था। वह अक्सर यह कहता था कि पुलिस उसे ज्‍यादा दिन तक हिरासत में नहीं रख सकती है क्‍योंकि वह पाकिस्‍तान और आईएसआई के लिए काफी खास है। अजहर अक्‍सर पुलिस वालों को बताता, 'तुम लोगों को मेरी पॉपुलैरिटी के बारे में नहीं मालूम है अभी। आईएसआई मुझे पाकिस्‍तान वापस लाकर रहेगी।'

    डैनियल पर्ल का हत्‍यारा अजहर

    डैनियल पर्ल का हत्‍यारा अजहर

    अजहर की गिरफ्तारी के 10 माह बाद फरवरी 1994 में दिल्‍ली में कुछ विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया गया था। अपहरणकर्ताओं ने उस समय उसकी रिहाई की मांग की थी। प्‍लान असफल रहा और फिर हाइजैंकिंग को अंजाम दिया गया। पाकिस्‍तान में वॉल स्‍ट्रीट जनरल के रिपोर्टर डैनियल पर्ल की सिर कलम करके उसकी हत्‍या में अजहर का ही हाथ था। मोहानाने को याद है कि जिस समय हाइजैकिंग को अंजाम दिया गया था उस समय वह अपनी नई पोस्टिंग पर थे और यहां पर उन्‍हें 31 दिसंबर 1999 को अजहर की रिहाई के बारे में पता लगा था।

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