सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ करेगी तीन तलाक मुद्दे पर सुनवाई

देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने गुरुवार को कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को लेकर दायर की गई सभी याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ मई माह में करेगी।

नई दिल्‍ली। देश की सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने गुरुवार को कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को लेकर दायर की गई सभी याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की संविधान पीठ मई माह में करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पांच जजों की संविधान पीठ सभी पहुलओं पर विचार-विमर्श करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा बहुत गंभीर है और अब इसे टाला नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ करेगी तीन तलाक मुद्दे पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तीन तलाक को लेकर केंद्र सरकार ने कोर्ट के सामने कुछ सवाल रखे। केंद्र के अलावा कुछ और पक्षों के भी सवाल आए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबधित पक्षों से कहा है कि वे 30 मार्च, 2017 तक लिखित में अपनी बात अटॉर्नी जनरल के पास जरूर जमा करा दें।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने कहा इस मामले में सिर्फ कानूनी पहलुओं पर ही सुनवाई होगी। साथ ही सभी पक्षों के एक-एक शब्द पर अदालत गौर करेगी। जे एस खेहर ने कहा कि अदालत कानून से अलग नहीं जा सकती। आपको बताते चलें कि 11 मई से गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ही इस मामले पर सुनवाई शुरू होगी। उसके पहले अदालत 30 मार्च को तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह प्रथा के संबंध में विचार के लिए मुद्दे तय करेगी।

इस सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अलावा भी मामले से संबंधित कुछ पक्षों ने अपने सवाल रखे, पर पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सवालों को फिर से देखा जाएगा। इसलिए कोर्ट ने सभी पक्षों से एटॉर्नी जनरल के पास अपने सवाल जमा करने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह संविधान से जुड़ा मामला है। उन्‍होंने कहा कि हम लोगों की आस्था की कद्र करते हैं, पर देश में चल रही ऐसी प्रथाएं आस्था नहीं हो सकतीं। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसी प्रथाओं को 20 मुस्लिम देशों में पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

कौन से सवाल सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने रखें-

-समानता और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्राथमिकता किसको दी जाए?
-पर्सनल लॉ को संविधान के अनुच्‍छेद 13 के तहत कानून माना जाएगा या नहीं?
-देश में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत तीन तलाक, हलाला और बहु-विवाह की इजाजत संविधान के दायरे में दी जा सकती है या नहीं ?
-क्या तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किए हैं?
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