98% कश्मीरियों को कोरोना के इंफेक्शन का खतरा- ICMR survey

नई दिल्ली- जम्मू-कश्मीर पहले से ही आतंकवाद और पाकिस्तान की हरकतों से परेशान हैं। ऐसे में कश्मीर में डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर निसार-उल हसन ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक सर्वे का हवाला देकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस सर्वे के मुताबिक पाकिस्तान दूश्मनों का सामना कर रहे घाटी के लोगों के लिए सामने से नहीं दिखने वाला दुश्मन कोरोना और भी खतरनाक साबित हो सकता है। जम्मू-कश्मीर में रविवार तक कोरोना वायरस संक्रमण के करीब 5 हजार मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन, सर्वे के आधार पर दावा किया गया है कि घाटी की 98 फीसदी आबादी के इस वायरस से संक्रमित होने के आसार हैं, इसलिए उन्हें बहुत ही सावधान रहने और तमाम एहतियाती उपाय अपनाने जरूरी हैं।

98% कश्मीरियों को कोरोना के इंफेक्शन का खतरा

98% कश्मीरियों को कोरोना के इंफेक्शन का खतरा

भारत में कोरोना वायरस संक्रमितों के नए मामलों की तादाद रोजाना 12,000 के करीब पहुंच रही है, जबकि देश में यह स्थिति अभी और भी ज्यादा बिगड़ने की आशंका बची ही हुई है। देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य से जुड़ी संस्था इंडिनय काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च का अनुमान है कि जुलाई-अगस्त में यह आंकड़ा अपने चरम पर पहुंच सकता है। टाइम्स नाउ की एक खबर के मुताबिक देश की इस टॉप मेडिकल बॉडी ने हाल में एक सर्वे करवाया है, जिसमें ये बात सामने आई है कि कश्मीर के 98 फीसदी लोग कोविड-19 के संक्रमण के प्रति अतिसंवेदनशील हैं और सिर्फ 2 फीसदी आबादी में ही एंटीबॉडीज विकसित होने के संकेत मिले हैं।

हर्ड इम्युनिटी कोसों दूर है- सर्वे

हर्ड इम्युनिटी कोसों दूर है- सर्वे

विशेषज्ञों ने ये भी दावा किया है कि घाटी अभी भी herd immunity की स्थिति से कोसों दूर है। मसलन, कश्मीर में डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर निसार-उल हसन के मुताबिक पुलवामा जिले में आईसीएमआर के द्वारा मई महीने में करवाए गए 'सीरो-सर्विलांस स्टडी से पता चला था कि जितने लोगों का सर्वे हुआ उनमें से सिर्फ 2 फीसदी लोगों के खून में ही एंटीबॉडीज पाए गए। एंटीबॉडीज की मौजूदगी का मतलब है कि व्यक्ति पिछले दिनों संक्रमित हुआ था और अब उसके शरीर को वायरस प्रति इम्युनिटी प्राप्त है।' जानकारी के मुताबिक सर्वे में 400 बल्ड सैंपल को शामिल किया गया था, जिनमें से सिर्फ 8 में ही ऐसे एंटीबॉडीज पाए गए, जो कोरोना वायरस को मात दे सकते थे। उन्होंने ये भी दावा किया कि 'ज्यादातर लोग कोविड-19 के प्रति इम्यून नहीं हैं और जहां तक हर्ड इम्युनिटी की बात है तो वह अभी भी बहुत दूर है।'

बचकर रहें तभी बचे रहेंगे

बचकर रहें तभी बचे रहेंगे

हासन ने एक तरह से खतरे की घंटी बजाते हुए दावा किया है कि लोग जैसे ही बाहर निकलेंगे वह नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित होंगे। हालांकि, वे ठीक भी हो सकते हैं और फिर से इस वायरस के प्रति इम्युनिटी भी हासल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई है कि अगर इस वायरस ने अपने को बदल लिया और दूसरे ढंग से व्यवहार करना शुरू किया तो मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं और इसकी चपेट में आकर और लोगों की जान जा सकती है। उन्होंने लोगों को चेताया है कि जो लोग सोचते हैं कि ज्यादा खतरा नहीं है, वो संभल जाएं। उन्होंने कहा है कि लोग मान लें कि इस जानलेवा वायरस से बचने के वही उपाय हैं, जो बार-बार बताए जा रहे हैं। यानि, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, घर से बाहर मास्क लगाएं और बार-बार हाथों को धोते रहें। यही वो उपाय हैं जो कोरोना से बचा सकते हैं।

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