'गुजरात मॉडल, आजादी का इतिहास', 10 प्वाइंट में समझिए अधिवेशन के लिए कांग्रेस ने गुजरात को ही क्यों चुना?
Congress Convention: कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन 8 और 9 अप्रैल को अहमदाबाद में आयोजित होने जा रहा है। लगभग 6 दशक के बाद ये पहला मौका है जब कांग्रेस पार्टी गुजरात में राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन कर रही है।
इससे पहले साल 1961 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ था। कांग्रेस का ये अधिवेशन गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए अहम मानी जा रही है।

कई बार गुजरात में हो चुका है कांग्रेस का अधिवेशन
गुजरात में इससे पहले 1961 में भावनगर में AICC का अधिवेशन हुआ था। वहीं साल 1938 में सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हरिपुरा (सूरत) अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ था। अहमदाबाद में साल (1902, 1921) और सूरत (1907) में भी कांग्रेस अधिवेशन हुए, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मील के पत्थर साबित हुए।
अधिवेशन का दो-दिवसीय कार्यक्रम
- 8 अप्रैल को सुबह 11 बजे कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक शाहिबाग स्थित ऐतिहासिक सरदार स्मारक में होगी।
- शाम 5 बजे साबरमती आश्रम में प्रार्थना सभा रखी गई है, जो गांधीजी की विरासत को श्रद्धांजलि होगी।
- रात 7:45 बजे साबरमती रिवरफ्रंट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और कांग्रेस के योगदान को दर्शाया जाएगा।
9 अप्रैल को मुख्य अधिवेशन
9 अप्रैल को मुख्य अधिवेशन साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित होगा, जिसमें देशभर से 3,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रमुख नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, CWC सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होंगे।
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जानिए गुजरात को ही क्यों चुना?
लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि, आखिर क्या वजह है कि कांग्रेस पार्टी अपने अधिवेशन के लिए गुजरात को चुना है। इस सवाल का जवाब जानिए 10 प्वाइंट में
गुजरात की सत्ता से लंबे समय से बाहर: कांग्रेस पार्टी लगभग तीन दशकों से गुजरात की सत्ता से बाहर है। 2027 में होने वाले चुनाव में वापसी में ये अधिवेशन मददगार साबित हो सकती है।
इतिहास से जोड़ने की रणनीति: कांग्रेस गुजरात को स्वतंत्रता संग्राम के केंद्र के रूप में दिखाकर अपने ऐतिहासिक जुड़ाव को जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
गुजरात मॉडल को चुनौती: 2014 के चुनाव में जिस गुजरात मॉडल के जरिए पीएम मोदी ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया उस मॉडल का नैरेटिव को तोड़ने के लिए गुजरात चुनाव जीतना जरूरी है
राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, कांग्रेस पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को पूरे देश में तभी मजबूती से चुनौती दे पाएगी जब वो गुजरात में राजनीतिक रूप से मजबूत हो जाए
कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देना: इस राष्ट्रीय अधिवेशन के जरिए कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह और आत्मविश्वास भरने की कोशिश कर रही है।
गुजरात की जनता को संदेश: कांग्रेस आजादी की लड़ाई में गुजरात की भूमिका को उजागर कर जनता को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि, पार्टी का राज्य के साथ ऐतिहासिक रिश्ता है।
नए नेतृत्व को तैयार करना: कांग्रेस गुजरात में युवाओं और नए नेताओं को आगे लाकर एक नई राजनीतिक धारा तैयार करने की कोशिश कर रही है।
स्थानीय मुद्दों पर फोकस: कांग्रेस अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई, किसान संकट पर फोकस कर रही है।
संगठनात्मक मजबूती पर जोर: बूथ लेवल तक संगठन को मजबूत किया जा रहा है ताकि ग्राउंड पर पकड़ मजबूत की जा सके।
धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव: कांग्रेस यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि, वह केवल धर्मनिरपेक्ष नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी गुजरात की मिट्टी से जुड़ी हुई है।
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