2005 BJP कार्यकर्ता हत्याकांड में CPI(M) के 8 सदस्यों को उम्रकैद, केरल CM के सहयोगी का भाई भी दोषी!

Kerala: केरल के कन्नूर में 19 साल पुराने हत्या के एक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। 2005 में बीजेपी कार्यकर्ता एलंबिलाय सूरज की निर्मम हत्या के मामले में सोमवार को कन्नूर जिला सत्र न्यायालय ने 8 CPI(M) कार्यकर्ताओं को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस केस में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के प्रेस सचिव के भाई भी दोषी पाए गए हैं, जिससे मामला और भी चर्चा में आ गया है।

हत्या के इस मामले में एक अन्य CPI(M) कार्यकर्ता को तीन साल की कठोर कैद की सजा दी गई है। अदालत ने पहले ही शुक्रवार को सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद सोमवार को उन्हें सजा सुनाई गई। इस फैसले के बाद केरल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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क्या है पूरा मामला?

7 अगस्त 2005 को केरल के कन्नूर जिले के मुझप्पिलंगड गांव में 32 वर्षीय एलंबिलाय सूरज की दिनदहाड़े नृशंस हत्या कर दी गई थी। सूरज पहले CPI(M) पार्टी से जुड़े हुए थे, लेकिन 2003 में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली। उनके इस फैसले से CPI(M) के स्थानीय नेताओं में नाराजगी बढ़ गई थी और उन पर हमला करने की साजिश रची गई।
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हत्या से एक साल पहले, 2004 में भी सूरज पर हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। ठीक होने के बाद, जब उन्होंने फिर से सामान्य जीवन शुरू किया, तो उन पर दोबारा हमला किया गया, जो उनकी मौत का कारण बना।

कौन-कौन दोषी करार दिए गए?

अदालत ने उम्रकैद की सजा जिन 8 लोगों को सुनाई है, उनमें CPI(M) के कई बड़े नाम शामिल हैं:

  • टी के राजीश - जो पहले से ही 2012 में टी पी चंद्रशेखरन की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
  • पी एम मनोराज - मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के प्रेस सचिव पी एम मनोज के भाई।
  • प्रभाकरन मास्टर - CPI(M) के पूर्व स्थानीय सचिव और एडकड पंचायत के पूर्व अध्यक्ष।
  • के वी पद्मनाभन और मानोम्बेथ राधाकृष्णन - CPI(M) के स्थानीय समिति के सदस्य।

गौर करने वाली बात यह है कि प्रभाकरन, पद्मनाभन और राधाकृष्णन पहले भी 2004 में सूरज पर हुए हमले के आरोपी थे।

कैसे रची गई सूरज की हत्या की साजिश?

चार्जशीट के मुताबिक, 5 अगस्त 2005 को पांच आरोपियों ने मिलकर सूरज को खत्म करने की योजना बनाई थी।

7 अगस्त 2005 को छह आरोपी एक ऑटो-रिक्शा में सवार होकर मौके पर पहुंचे। ऑटो-रिक्शा को उन्हीं के एक साथी ने चलाया था। उन्होंने सूरज को घेर लिया और घातक हथियारों से हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

मामले में नया मोड़ कब आया?

इस केस की सुनवाई 2010 में शुरू हुई, लेकिन लंबे समय तक इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई। 2012 में CPI(M) समर्थित गैंग लीडर टी के राजीश को गिरफ्तार किया गया, जो टी पी चंद्रशेखरन की हत्या में शामिल था। पुलिस पूछताछ के दौरान राजीश ने कबूल किया कि उसने सूरज की हत्या समेत कई राजनीतिक हत्याओं को अंजाम दिया है।

इसके बाद, केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने सूरज हत्याकांड की दोबारा जांच शुरू की और मजबूत सबूतों के आधार पर दोषियों को सजा दिलवाई। इस फैसले के बाद केरल की राजनीतिक गलियारों में CPI(M) की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इस केस में पार्टी से जुड़े कई प्रभावशाली लोग शामिल थे।
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