कभी थे इंग्लिश के लेक्चरर अब चलाते हैं ऑटो रिक्शा, 74 साल के रमन की दिल छू जाने वाली कहानी
बेंगलुरु, 01 अप्रैल: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक 74 साल का ऑटो ड्राइवर छाया हुआ है। अब आप सोच रहे हैं कि इसमें क्या नया है? इस उम्र के कई लोगों ऑटो चलाते दिख जाएंगे। लेकिन क्या आपने कभी किसी इग्लिश से रिटायर लेक्चर को ऑटो चलाते देखा है? नहीं ना...। बेंगलुरू के रहने वाले 74 साल के पाताबी रमन इन दिनों ऑ़टो चला रहे हैं। लेकिन इस काम में आने से पहले वे इंग्लिश के लेक्चरर थे। बेंगलुरू में एक निजी फ़र्म में काम करने वाली निकिता अय्यर ने एक अंग्रेजी के लेक्चरर से ऑटो-ड्राइवर बने रमन से मिलने पर हुआ अपना अनुभव लिंक्डइन पर शेयर किया है।

फर्राटेदार इंग्लिश सुनकर दंग रह गईं निकिता
निकिता ने कहानी को शेयर करते हुए लिखा कि, एक सुबह उनको काम पर जाने में देर हो रही थी, इसी दौरान 74 वर्षीय बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा चालक उनकी मदद करने के लिए रुका। रिक्शा चालक ने पूछा कि, आपको कहां जाना है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक शहर के दूसरे छोर पर अपने कार्यालय तक पहुंचना है और वह पहले ही काफी लेट हो चुकी हैं। उन्होंने कहा, "Please come in Maa'm, you can pay what you want। बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा के मुंह से फर्राटेदार इंग्लिश सुनकर निकिता हैरान रह गईं। लेकिन उन्होंने ऑटो को किराए पर लेने का फैसला किया और उसके बाद सफर के 45 मिनट बहुत ही शानदार गुजरे।

दिल छू ले वाली कहानी
रमन के व्यवहार से प्रभावित होकर निकिता उनके ऑटो में बैठ गईं लेकिन निकिता के अंदर उनके बारे में जानने की जिज्ञासा जाग उठी। निकिता ने रमन से पूछा, 'आप इतनी अच्छी अंग्रेजी कैसे बोल लेते हैं? जवाब में बुजुर्ग ऑटो-रिक्शा चालक ने जो बताया वो सबको पढ़ना चाहिए। बुजुर्ग ने बताया कि एक समय में वो मुंबई में इंग्लिश के लेक्चरर हुआ करता थे। उन्होंने एमए और एम एड कर रखा है। रिटायर्ड होने के बाद उन्हें कर्नाटक में नौकरी नहीं मिली इसलिए वो ऑटो चालक बन गए।

इसलिए चलाना पड़ रहा है ऑटो
आगे रमन ने कहा कि अब आप पूछना चाहती होगी कि आखिर में ऑटो क्यों चला रहा हूं ? उन्होंने विस्तार से बताया कि वे पिछले 14 सालों से ऑटो चला रहे हैं, जब से वे कॉलेज लेक्चरर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने आगे बताया कि मुंबई में एक लेक्चर के रूप में काम किया, क्योंकि उन्हें कर्नाटक में कोई नौकरी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उनसे सिर्फ 'जाति' पूछी जाती थी, कर्नाटक के कॉलेजों से मिली इस प्रतिक्रिया से तंग आकर वे महाराष्ट्र के मुंबई चले गए, जहां उन्हें एक प्रतिष्ठित कॉलेज में नौकरी मिल गई।

हर दिन इतनी हो जाती है कमाई
60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने पवई के एक कॉलेज में 20 साल तक काम किया और कर्नाटक के बेंगलुरु वापस चले गए। उन्होंने हंसते हुए बताया कि शिक्षकों को अच्छी तरह से भुगतान नहीं मिलता है। आप अधिकतम 10 से15,000/- कमा सकते हैं और एक एक निजी संस्थान था, इसलिए मुझे पेंशन नहीं है। रिक्शा चलाने से मुझे कम से कम 700 से 1500/- एक दिन में मिल जाता है। मेरे और मेरी 'गर्लफ्रेंड' के लिए ये पर्याप्त है।

‘अब मैं अपनी सड़क का राजा हूं'
'गर्लफ्रेंड' शब्द पर हंसते हुए उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नी को अपनी गर्लफ्रेंड कहते हैं। अय्यर ने लिखा कि रमन की 'गर्लफ्रेंड' 72 साल की है और घर की देखभाल करती है। वे कडुगोडी में एक 1 बीएचके में रहते हैं। उनका बेटा 12,000 रुपये का किराया देने में मदद करता है,लेकिन उससे बाद वे अपने बच्चों पर निर्भर नहीं हैं। रमन ने कहा कि 'अब मैं अपनी सड़क का राजा हूं। मैं जब चाहूं अपना ऑटो निकाल सकता हूं और जब चाहूं काम कर सकता हूं.।












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