Fake News: 7 साल की सजा ,10 लाख रुपए जुर्माना, भाजपा सांसद क्यों लेकर आए ये बिल? जानिए

बीजेपी के सांसद मनोज किशोरभाई कोटक ने फेक न्यूज पर रोक लगाने के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल का मसौदा तैयार किया है। इस विधेयक में फेक न्यूज फैलाने के दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा या 10 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों का ही प्रावधान है।

इस समय देश में सोशल मीडिया की वजह से फेक न्यूज की बाढ़ आई हुई है। इसी वजह से मुंबई नॉर्थ ईस्ट लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद मनोज कोटक ने यह निजी विधेयक लाने की तैयारी की है, जिसका नाम है- 'प्रोहिबिशन ऑफ फेक न्यूज ऑन सोशल मीडिया बिल, 2023'।

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फेक न्यूज के खिलाफ हाई लेवल अथॉरिटी का प्रस्ताव
इस विधेयक में फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए एक सोशल मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। प्रस्ताव के मुताबिक इस अथॉरिटी के अध्यक्ष केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री होंगे और साथ ही इसमें दोनों सदनों के एक-एक सांसदों की भी सदस्यता रहेगी। इनके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दो प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह दी जानी है और एक आईएएस अधिकारी को इसका सचिव बनाया जाएगा।

मानसून सत्र में आ सकता है विधेयक
फेक न्यूज के खिलाफ इस प्राइवेट मेंबर बिल को आने वाले मानसून सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। विधेयक के प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक रेगुलेटरी अथॉरिटी की महीने में कम से कम दो बैठकें होंगी और यह सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के फैलने पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करेगी।

7 साल तक की सजा और 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि यदि अथॉरिटी पाती है कि 'कोई सोशल मीडिया यूजर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज पोस्ट करने का दोषी है, तो उसे कारावास की सजा मिलेगी, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना, जिसे 10 लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है या दोनों ही सजा दी जा सकती है.... '

2021 के महाराष्ट्र दंगों की वजह से आया आइडिया
मनोज कोटक ने ईटी को बताया है कि उन्हें फेक न्यूज के खिलाफ इस तरह का बिल लाने का आइडिया 2021 में महाराष्ट्र के अमरावती और दूसरे इलाकों में हुए दंगों की वजह से आया है, जिसके बारे में पता चला था कि वह फेक न्यूज की वजह से भड़का था।

सोशल मीडिया के माध्यम से दंगे भड़काने की रिपोर्ट
दरअसल, 2021 के नवंबर में महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़ और मालेगांव में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। तब टाइम्स नाउ ने महाराष्ट्र पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया था कि हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर 60 से 70 पोस्ट का इस्तेमाल किया गया था। यह भी बातें सामने आई थीं कि यह सबकुछ पूर्व-निर्धारित एजेंडे के तहत किया गया था।

अबतक 14 निजी विधेयक बन पाए हैं कानून
गौरतलब है कि प्राइवेट मेंबर बिल एक सांसद अपनी निजी हैसियत से ला सकता है और उसका सरकार या उसकी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं होता। 1952 में देश की पहली लोकसभा से लेकर अबतक सिर्फ ऐसे 14 निजी विधेयक ही कानून का शक्ल अख्तियार कर पाए हैं। लेकिन, पिछले करीब पांच दशकों में एक भी निजी विधेयक कानून नहीं बन पाया है।

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