NCRB की रिपोर्ट में नकली कैश लेकर बड़ा दावा, ₹ 2000 के नोट को लेकर बढ़ी आशंका
नई दिल्ली, 30 अगस्त। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की पिछले साल जब्त की गई फेक करेंसी को लेकर ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में जब्त किए गए नकली धन में से लगभग 60% ₹2,000 मूल्यवर्ग के थे। नोटबंदी के बाद बड़े मू्ल्य से 2000 रुपये के नोट को लेकर अब आशंकाएं बढ़ गई हैं।

साल 2016 के बाद से नकली धन की जब्ती में काफी वृद्धि हुई है। ताजा आंकड़ों से पता चलता है वर्ष 2021 में जब्त किए गए सभी नकली धन में से लगभग 60% ₹ 2,000 मूल्यवर्ग के थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने संकलित डेटा के अध्ययन की बाद ये रिपोर्ट जारी की है। एनसीआरबी के अनुसार, 2021 में जब्त किए गए कुल ₹20.39 करोड़ के नकली भारतीय नोटों में से ₹12.18 करोड़ ₹2,000 के मूल्यवर्ग में थे।
सरकार द्वारा पुराने ₹500 और ₹1,000 के नोटों को खत्म करने के बाद 2016 में ₹2000 और ₹500 के नए नोटों को पेश किया गया था। सरकार ने कहा था कि नकली भारतीय मुद्रा नोटों (FICN) के प्रचलन पर अंकुश लगाना 2016 के विमुद्रीकरण अभ्यास के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक था। लेकिन एनसीआरबी के आंकड़ों तुलना अगर साल 2016 से करें तो अब तक इसमें काफी वृद्धि दर्ज की गई है।
साल 2016 में ₹15.92 करोड़ की नकली मुद्रा जब्त की गई थी, 2017, 2018, 2019, 2020 और 2021 में जब्ती क्रमशः ₹28.10 करोड़, ₹17.95 करोड़, ₹25.39 करोड़, ₹92.17 करोड़ और ₹20.39 करोड़ थी। 2015 में, विमुद्रीकरण से पहले, नकली मुद्रा में ₹15.48 करोड़ जब्त किए गए थे।
2020 में भारी वृद्धि पुणे के एक घर से बरामद किए गए "चिल्ड्रन बैंक ऑफ इंडिया" से जारी किए गए डमी पैसे की जब्ती के कारण हुई थी। 10 जून, 2020 को, पुलिस ने ₹82.8 करोड़ के नकली नोट बरामद किए, जिनमें से ₹43 करोड़ पुणे के घर से ₹2,000 के मूल्यवर्ग में थे। इस अपराध के लिए एक सेवारत सेना अधिकारी सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने पाया कि आरोपी डॉलर के बिल को रुपये में बदलने के दौरान नकली पैसे में फिसलकर ग्राहकों को ठगता था।












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