55 डॉक्टरों और शिक्षकों ने सरकार को लिखा पत्र, कहा- बच्चों में कोविड का खतरा कम, खोल दें स्कूल
नई दिल्ली, 28 अगस्त: इस साल अप्रैल में जब कोरोना महामारी की दूसरी लहर आई, तो सबसे पहले स्कूलों को बंद किया गया। अब नए शिक्षा सत्र के दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्कूलों पर अभी भी ताले लटके हैं। हालांकि ऑनलाइन क्लास पहले की तरह चल रही है। इस बीच 55 से ज्यादा डॉक्टरों और शिक्षकों ने पीएम ऑफिस, शिक्षा मंत्री समेत कई मंत्रालयों को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है। जिसमें सबसे पहले प्राइमरी स्कूलों को खोलने की मांग की गई, क्योंकि छोटे बच्चों को संक्रमण का खतरा कम है।

इस पत्र को राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपाल और केंद्रीय मंत्रियों को भी भेजा गया है। पत्र लिखने वालों के मुताबिक स्कूल खोलने का समर्थन करने के लिए उनके पास वैश्विक सबूत हैं। ऐसे में सरकार को तुरंत स्कूल खोलने और व्यक्तिगत रूप से कक्षाएं शुरू करने पर विचार करना चाहिए। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने कहा कि बच्चों के स्कूल खोलने के लिए टीके का इंतजार करना गलत है। टीकाकरण सिर्फ गंभीर रूप से बीमार पड़ने और मृत्यु को रोकता है। टीका लगवाने के बाद भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। वैसे भी पहले कई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि बच्चों को वयस्कों की तुलना में कम खतरा है।
पत्र में आगे कहा गया है कि एक सीरो सर्वे के मुताबिक 60-80 प्रतिशत बच्चों को प्राकृतिक संक्रमण हुआ है। ऐसे में बच्चों के लिए टीकाकरण का लाभ वयस्कों के मुकाबले बहुत कम है। यूके ने बच्चों का टीकाकरण नहीं करने का फैसला किया। जिस वजह से सबसे पहले स्कूल खोलने के लिए वैक्सीन की शर्त हटानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं पर भी बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है, लेकिन बहुत से देश स्कूलों का संचालन सामान्य रूप से कर रहे हैं।












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