GST के आने के बाद हाउसिंग सोसाइटी में रहना होगा महंगा,जानें 5 वजहें

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नई दिल्ली। जीएसटी आने के बाद हाउसिंग सोसाइटी में रहना महंगा हो जाएगा। गुड्स एंड सर्विस टैक्स के दायरे में हाउसिंग सोसाइटी और आरडब्ल्यूए भी आएंगे, जिससे सोसाइटी में रहने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की उम्मीद है। इसके लिए उनको भी जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि इसमें सभी हाउसिंग सोसाइटी को शामिल नहीं किया गया है। आपको बताते है वो वजहें जिनसे हाउसिंग सोसाइटी में रहना महंगा हो जाएगा।

 जीएसटी में प्रॉपर्टी टैक्स शामिल नहीं

जीएसटी में प्रॉपर्टी टैक्स शामिल नहीं

जीएसटी में प्रॉपर्टी टैक्स शामिल नहीं है, जिसकी वजह से प्रॉपर्टी के मालिक को जीएसटी के अलावा राज्य नियमों के मुताबिक ये टैक्स अलग से देने होंगे। इससे प्रॉपर्टी मालिकों पर बोझ बड़ेगा। प्रॉपर्टी टैक्स पर जीएसटी नहीं लग सकता क्योंकि जीएसटी के अंतर्गत डबल टैक्स नहीं लग सकते।

मेंटेनेंस चार्ज बढ़ेंगे तो टैक्स भी बढ़ेगा

मेंटेनेंस चार्ज बढ़ेंगे तो टैक्स भी बढ़ेगा

अगर आप ऐसी हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं जहां आपको एक महीने में 5 हजार रुपये से ज्यादा मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ता है तो आपको 18% जीएसटी देने के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि मौजदा रेट 15.55% हैं जिसमें 15% सर्विस टैक्स, 0.5% स्वच्छ भारत सेस और 0.05% गैर-कृषि टैक्स भी होता है। जीएसटी के बाद 2.5% भार और बढ़ जाएगा। सरकार ने वैसी सोसाइटी और आरडब्ल्यूए को रियायत दी है जिनका कॉपर्स फंड 20 लाख रुपये से कम है और वो 5000 हजार रुपये से कम हर महीने मेंटेनेंस चार्ज वसूलते हैं।

अतिरिक्त शुक्ल देने होंगे

अतिरिक्त शुक्ल देने होंगे

पानी जैसे यूटिलिटी बिल पर अलग से टैक्स लगेगा जो सालाना मेंटेनेंस चार्ज में नहीं आएगा। हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोगों को मेंटेनेंस के अलावा पानी, बिजली जैसी सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुक्ल देना पड़ेगा। इससे हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले लोगों को ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

मरम्मत की लागत भी देनी होगी

मरम्मत की लागत भी देनी होगी

आप जिस हाउसिंग सोसाइटी रहते है अगर वहां कोई मरम्मत काम होता है तो रिपेयर फंड 18 प्रतिशत होगा। सीमेंट, पेंट, स्टील जैसी चीज़ें रेनोवेशन के लिए खरीदी जाएंगी, तो इनपर भी जीएसटी लगेगा।

 बड़ी हाउसिंग सोसाइटी के लिए समस्या

बड़ी हाउसिंग सोसाइटी के लिए समस्या

ऐसी हाउसिंग सोसाइटी जिनका सालाना कोष 20 लाख से ऊपर होता है उनका रजिस्ट्रेशन जीएसटी के लिए अनिवार्य है। अगर हाउसिंग सोसायटी प्रति फ्लैट 5 हजार से कम मेंटेनेंस चार्ज ले रही है, लेकिन उसके मेंबर ज्यादा हैं और कुल 20 लाख से ऊपर कलेक्शन हो जाता है तो भी उसे जीएसटी देना होगा।

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English summary
5 reasons why living in housing society will be expensive under GST
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