काम के बीच 5 मिनट का योगा-ब्रेक, सरकार ने कर्मचारियों के लिए लॉन्च किया खास एप
नई दिल्ली, 4 सितम्बर। अगर आप कभी सरकारी ऑफिस की लाइन में लगकर काउंटर तक पहंचे हो और इसी दौरान सामने बैठा कर्मचारी आपसे कह दे कि वह योगा ब्रेक ले रहा है तो चौंकिएगा नहीं। यह ब्रेक वह कर्मचारी की मनमर्जी नहीं है बल्कि सरकार ने ऐसा करने को कहा है।
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सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों को आयुष मंत्रालय द्वारा विकसित एक एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा है। इस एप्लीकेशन में पांच मिनट का योग प्रोटोकॉल इनबिल्ट है।
भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 2 सितम्बर को एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है "वाई-ब्रेक (योग ब्रेक) प्रोटोकॉल के उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए और सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के बीच भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों से अनुरोध किया जाता है।
आदेश में आगे कहा गया है कि सभी मंत्रालय और विभाग प्रोटोकॉल के तहत कर्मचारी को गूगल प्ले स्टोर से वाई ब्रेक नामक एंड्राएड आधारित एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें।
मंत्रालय ने लॉन्च किया है एप
आयुष मंत्रालय ने एक दिन पहले ही एक भव्य समारोह में इस मोबाइल एप को लॉन्च किया था। कार्यक्रम में सरकार के छह मंत्री शामिल थे। कार्यक्रम में ही कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री जितेंद्र सिंह ने कानून मंत्री किरेन रिजिजू से कार्यस्थल पर 5 मिनट योग को लेकर एक कानून बनाने का आग्रह किया ताकि लोग इसका लाभ उठा सकें।
एप के बारे में आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पांच मिनट का योग प्रोटोकॉल विशेष रूप से कामगार प्रोफेशनल की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने में मददगार होगा। इसक साथ ही कार्यस्थल पर तनाव को दूर करने, तरोताजा और फिर से ध्यान केंद्रित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें आसन, प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं।
उन्होंने कहा "हम जानते हैं कि कॉर्पोरेट प्रोफेशनल अक्सर अपने व्यवसाय के कारण तनाव का अनुभव करते हैं। अन्य कामों में लगे लोगों को भी ऐसी ही मुश्किल का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही लोगों को ध्यान में रखते हुए यह वाई-ब्रेक कर्मचारियों को कार्यस्थल पर कुछ आराम देगा।
कब बना एप?
आयुष मंत्रालय ने 2019 में एक विशेषज्ञ समिति के माध्यम से कार्यस्थल पर कर्मचारियों के लिए 5 मिनट के योग प्रोटोकॉल को डिजाइन और विकसित किया था। जनवरी 2020 इस एप को छह प्रमुख महानगरों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मॉड्यूल लॉन्च किया गया। जहां पर इसकी प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक देखी गई।












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