'एक शख्स से 406 लोग तक संक्रमित हो सकते हैं अगर...' कोविड अनुकूल बर्ताव पर केंद्र की चेतावनी
नई दिल्ली, 20 मई: केंद्र सरकार लगातार लोगों से कोविड अनुकूल बर्ताव करने की अपील कर रही है। गुरुवार को भारत के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार ने इसको लेकर एक व्यापक गाइडलाइन भी जारी की है और साफ लफ्जों में समझाने की कोशिश की है कि एयरोसोल में मौजूद कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति से 10 मीटर दूर तक जाकर दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। इसलिए, इसमें फिर से सोशल डिस्टेंसिंग और डबल मास्क लगाने के साथ ही बाकी सभी कोविड अनुकूल बर्ताव करने पर जोर दिया गया है। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने उचित सोशल डिस्टेंसिंग न होने के खतरे के प्रति आगाह किया है और कहा है कि अगर इसके प्रति कोताही बरती गई तो एक इंफेक्टेड आदमी से एक महीने में 406 लोग तक संक्रमित हो सकते हैं।

....तो एक संक्रमित 406 लोगों को ले डूबेगा!
गुरुवार को हुए प्रेस कांफ्रेंस में लव अग्रवाल ने कहा कि अगर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सही तरीके से नहीं किया गया तो कोरोना वायरस से संक्रमित एक इंसान एक महीने में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है। लेकिन, जब 75 फीसदी तक भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर लिया जाता है तो उसी व्यक्ति से एक महीने में सिर्फ 2 से 3 व्यक्ति ही संक्रमित हो सकते हैं। हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की एक शोध में यह आंकड़े सामने आए हैं। भारत में इस समय एक व्यक्ति से दूसरे के संक्रमित होने का दर (आरओ) 1.5 और 4 के बीच है। आईसीएमआर ने इस दर को 2.5 के आधार पर हिसाब लगाया है कि ऐसा होने पर एक आदमी से 30 दिन में 406 आदमी तक को कोरोना हो सकता है।
50 फीसदी लोग मास्क नहीं पहन रहे
हालांकि, अकेले सोशल डिस्टेंसिंग से ही संक्रमण को नहीं रोका जा सकता। सही तरीके से मास्क पहनना कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे अहम साबित हो सकता है। लेकिन, सरकार ने यह भी पाया है कि देश में इतनी बदतर हालत के बावजूद 50 फीसदी लोग अभी भी मास्क नहीं पहन रहे हैं और 68 फीसदी पहनते भी हैं तो वह सिर्फ मुंह पर लटकाए रखते हैं, उनकी नाक खुली ही होती है। इसलिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मास्क पहनने पर नहीं, सही तरीके से पहनने पर जोर दिया है और साथ ही उचित सोशल डिस्टेंसिंग के पालन की गुजारिश की है।
सोशल डिस्टेंसिंग की दूरी 10 मीटर कर दी जाए ?
लेकिन, जब आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बलराम भार्गव से यह सवाल किया गया कि मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार की एडवाइजरी के बाद क्या अब सोशल डिस्टेंसिंग की दूरी 10 मीटर नहीं कर दी जानी चाहिए? इसपर उन्होंने कहा कि इस वायरस और इसके ट्रांसमिशन को लेकर रोजाना नई बातें सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, 'पहले यह पाया गया कि यह वायरस ड्रॉपलेट के माध्यम से फैलता है। अब यह पाया गया है कि माइक्रो-ड्रॉपलेट्स हैं, जो कि कम से कम 2 से 3 घंटे तक हवा में मौजूद रह सकते हैं।.....ड्रॉपलेट के लिए हम 6 फीट दूरी की सलाह देते हैं। माइक्रो-ड्रॉपलेट के लिए हम अच्छी वेंटिलेशन की सलाह देते हैं, ताकि यह छितरा जाए।'












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