युद्धग्रस्त सीरिया से वापस लौटे 4 भारतीय, बताया कैसे हैं वहां का मंजर, रोज सुनाई देती थी बम-मिसाइल की आवाजें
सीरिया इस वक्त युद्ध के बीच फंसा हुआ है और यहां राष्ट्रपति बशर अल-असल की सरकार का पतन हो गया है। युद्धग्रस्त सीरिया में फंसे चार भारतीय नागरिक शनिवार को वापस आ चुके हैं। भारतीय दूतावास ने उन्हें सीरिया से बाहर निकाला और दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचाया। भारत वापस आने के बाद उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय दूतावास के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत लौटे चारों भारती नागरिकों ने पिछले कुछ दिनों में सीरिया में रहने के अपने हालात बयां किए। साथ ही, बताया कि किस प्रकार दूतावास ने उन्हें भारत वापस आने में मदद की। एक भारतीय नागरिक ने कहा कि मैं 15-20 दिन पहले वहां गया था। भारतीय दूतावास ने हमें निकाला। पहले हम लेबनान गए और फिर गोवा और आज हम दिल्ली पहुंच गए हैं।

हमें खुशी है कि हम अपने देश पहुंच गए हैं। भारतीय दूतावास ने हमारी बहुत मदद की। युद्धग्रस्त सीरिया से निकाले गए एक अन्य भारतीय नागरिक ने कहा, "मैं पिछले 6 वर्षों से सीरिया में था। हमारी कंपनी ने हमें टिकट मुहैया कराए। भारतीय दूतावास ने हमारी बहुत मदद की और उन्होंने भोजन और हर चीज मुहैया कराई।
इस दौरान एक भारतीय नागरिक ने कहा कि मैं सीरिया में लगभग छह महीने तक रहा था और वहां स्थिति सामान्य थी। जब वहां संघर्ष शुरू हुआ, तो हमने दूतावास से संपर्क किया और उन्होंने हमारी मदद की और भोजन सहित सभी सुविधाएं प्रदान कीं... बाद में हमें लेबनान ले जाया गया और अब हम दिल्ली पहुंच गए हैं।
बताया कि मुझसे पहले 75 लोग जा चुके थे। हम दो दिन तक दूतावास में रहे। दूतावास ने हमारी मदद की और हमारी बहुत अच्छी देखभाल की। उसके बाद दूतावास ने कंपनी से बात की। मेरी कंपनी ने मेरे लिए टिकट बुक किए। दूतावास ने 75 लोगों के लिए टिकट बुक किए। इतना ही नहीं, सीरिया से उन्हें निकालने के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।
साथ ही, कहा कि इसके बाद दूतावास की टीम हम दोनों को लेबनान सीमा पर ले आई, फिर हमें होटल ले गई। फिर अगली टीम लेबनान से बेरूत गई। सभी से संपर्क किया गया, चाहे कोई अमीरात में हो या कहीं और और सभी लोग ग्रुप में हैं। करीब 80-90 लोग हैं। बाकी सब अभी चले गए हैं। अब हम चैन से सोएंगे।
सरकार ने अच्छा काम किया है। 75 लोगों को निकालकर नक्सली इलाके से बाहर लाना आसान नहीं है। हम 15 अगस्त और 26 जनवरी को दूतावास जाते थे। हम हमेशा दूतावास के संपर्क में रहते थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि हमने अपने दूतावास से संपर्क किया और उन्होंने हमें दमिश्क बुलाया, हम वहां 2-3 दिन रहे, फिर हमें बेरूत ले जाया गया।
रॉकेट और गोलियां की सुनाई देती थीं आवाजें
वहां स्थिति बहुत गंभीर है। हर दिन हमें रॉकेट और गोलियों की आवाजें सुनाई देती थीं। दूतावास ने हमारी बहुत मदद की और सभी सुविधाएं मुहैया कराईं। हालांकि, उन्होंने कहा कि दमिश्क से लेबनान तक दूतावास द्वारा की गई व्यवस्था और सुविधाएं बहुत अच्छी हैं। भारतीय नागरिक ने कहा कि दूतावास ने उन्हें आश्वासन दिया था कि अगर सीरिया में स्थिति खराब होती है तो वे उन्हें निकाल लेंगे।
उन्होंने कहा कि हम भारतीय दूतावास के संपर्क में थे। हमने हमेशा भारतीय दूतावास से कहा कि आप जो कहेंगे हम वैसा ही करेंगे, हमें इसके लिए कोई तनाव नहीं होगा। उन्होंने हमसे कहा कि यह गृहयुद्ध है, अगर यह शांत हो जाए तो ठीक है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हम तुम्हें बाहर निकाल देंगे। एक दिन दूतावास ने हमें बुलाया और कहा कि हमें यहां से चले जाना चाहिए।
हम दमिश्क में भारतीय दूतावास आए और फिर वे हमें लेबनान सीमा पर ले गए। मैं प्रधानमंत्री मोदी को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। भारतीय दूतावास के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा,'पाकिस्तान से आए लोगों को वीजा के लिए 36 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन, हमें छह घंटे में ही वीजा मिल गया।'
भारतीय दूतावास ने हमारी बहुत मदद की। हमें तीन-चार दिन तक एक फाइव स्टार होटल में रखा गया और खाना भी मुहैया कराया गया। दूतावास की यह कार्रवाई सीरिया में हिंसा में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।












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