36 साल बाद रुबैया सईद किडनैपिंग केस में CBI ने 1 आरोपी को किया अरेस्ट, पूर्व गृह मंत्री की बेटी से जुड़ा केस
Rubaiya Sayeed Kidnapping case: पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के 1989 के अपहरण मामले में सीबीआई को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 35 साल से फरार चल रहे शफात अहमद शांगलू को गिरफ्तार किया है। श्रीनगर के इश्बर निशात क्वार्टर का शफात अहमद शांगलू अपहरण में शामिल होने का आरोपी है। 36 साल पुराने इस संवेदनशील मामले में इस गिरफ्तारी ने नई जान फूंक दी है।
बता दें रुबैया सईद को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकवादियों ने अगवा किया था। पांच दिन बाद, सरकार द्वारा पांच आतंकवादियों को रिहा किए जाने के बाद रुबैया सईद को छोड़ दिया गया था।

सीबीआई ने बताया कि शांगलू जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख और अलगाववादी नेता यासीन मलिक का करीबी माना जाता है, जिस पर इस अपहरण मामले में पहले ही आरोप तय हो चुके हैं। मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।
शांगलू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था
शांगलू ने वर्ष 1989 के दौरान RPC (रणबीर दंड संहिता) और TADA (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध करने के लिए यासीन मलिक और अन्य के साथ मिलकर साजिश रची थी।" सीबीआई के अनुसार, शांगलू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
1989 का क्या है ये किडनैपिंग केस?
बता दें सईद वर्तमान में तमिलनाडु में रहती हैं और वे इस अपहरण मामले में सीबीआई के लिए एक प्रमुख गवाह भी हैं। सीबीआई की जांच के मुताबिक, दिसंबर 1989 के पहले हफ्ते में मलिक और अन्य ने रुबैया के अपहरण की साजिश रची थी। रुबैया तब श्रीनगर के लाल डेड अस्पताल में रेजिडेंट रोटरी इंटर्नशिप ट्रेनिंग कर रही थीं। सीबीआई ने 1990 के दशक की शुरुआत में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। यह घटना कश्मीर में आतंकवाद के एक भयावह दौर की शुरुआत मानी जाती है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।
आतंकियों ने गृह मंत्री की बेटी को बनाया था निशाना?
यह घटना 8 दिसंबर 1989 को हुई थी। जब देश में केंद्र में वी.पी. सिंह की सरकार थी औरमुफ्ती मोहम्मद सईद देश के गृह मंत्री थे। आतंकियों ने सीधे गृह मंत्री की बेटी को अपनी शर्ते मनवाने के लिए निशाना बनाया था। उनकी डिमांड विभिन्न जेलों में बंद अपने पांच साथियों की रिहाई सुनिश्चित करना था।
सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार गुलाम मोहम्मद से एक नीली कार उधार ली और 8 दिसंबर, 1989 को एक अन्य आरोपी मुश्ताक अहमद लोन के घर पर इकट्ठा हुए, जहां अस्पताल से नौगाम बायपास स्थित अपने घर लौटते समय गृह मंत्री की बेटी का अपहरण करने की योजना बनाई।
अस्पताल से लौटते समय आतंकियों ने किया था किडनैप
8 दिसंबर 1989 की शाम, पेशे से 23 वर्षीय डॉक्टर रुबैया सईद श्रीनगर के लाल डीड अस्पताल से ड्यूटी खत्म कर एक मिनी बस से घर लौट रही थीं। उउसी बस में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकी सवार थे। सदर थाना क्षेत्र के पास बस रोकी गई और उन्हें बंदूक के बल पर किडनैप कर लिया गया था।
सरकार को पांच आतंकियों को करना पड़ा था रिहा
यह खबर दिल्ली पहुँचते ही हड़कंप मच गया। देश के गृह मंत्री की बेटी का अपहरण भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती और गहरी शर्मिंदगी का विषय बन गया। JKLF का मकसद स्पष्ट था: जेल में बंद अपने पांच खूंखार साथियों को छुड़वाना। अपहरणकर्ताओं ने सरकार के सामने यही सीधी शर्त रखी थी। पांच दिन बाद, सरकार द्वारा पांच आतंकवादियों को रिहा किए जाने के बाद रुबैया सईद को छोड़ दिया गया था।
बता दें पूर्व गृह मंत्री की बेटी रुबैया इस मामले में अभियोजन पक्ष की गवाह के रूप में सूचीबद्ध हैं। उन्होंने अदालत की सुनवाई के दौरान मलिक के अलावा चार अन्य आरोपियों की पहचान अपराध में शामिल लोगों के तौर पर की थी। पूर्व गृह मंत्री की बेटी वर्तमान में तमिलनाडु में रहती हैं। यासीन मलिक को आतंकवाद के वित्तपोषण से संबंधित एक अलग मामले में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।












Click it and Unblock the Notifications