मोदी सरकार के तीन साल: विदेश में धाक तो देश में साख

16 मई और 26 मई 2014 को भारतीय राजनीति और भारत की सरकार को स्थायित्व देने का सुनहरा समय प्रारंभ हुआ।

नई दिल्ली। आजादी के 70 साल बीत रहे हैं। देश ने अनेक सरकारों को देखा है। आम जनता को सभी केन्द्रीय सरकारों के खट्टे-मीठे अनुभव प्राप्त हुए हैं। एक समय था जब विपक्ष सोच भी नहीं सकता था कि वह राष्ट्रीय स्तर पर सत्तासीन हो सकेगा, लेकिन लंबे समय तक विपक्ष में रहनेवाली पार्टी को जनता-जनार्दन ने अधिकांश राज्यों सहित केंद्र में भी व्यापक जनसमर्थन दिया है।

प्रतिकूलता में धैर्य और साहस की आवश्यकता होती है और अनुकूलता में मर्यादा और विनम्रता की आवश्यकता होती है।

भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज

भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज

16 मई और 26 मई 2014- यह तिथि भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हो चुकी है। भारतीय राजनीति और भारत की सरकार को स्थायित्व देने का सुनहरा समय प्रारंभ हुआ। समय किसी का सहोदर नहीं होता है। वह तो आता है और चला जाता है। आज जब हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन वर्षों के कार्यों और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यों का अवलोकन करते हैं तो लगता है कि मोदी सरकार आध्यात्मिक समाज के भगवान श्रीराम के मर्यादाओं से बंधकर जनहितार्थ कार्य करने में लगे हुए हैं और वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भगवान श्रीकृष्ण के पथ पर चलकर नयी राजनीति से दल का विस्तार करते हुए परिणाम तक ले जाने में जुटे हुए हैं।

अगड़ों और अमीरों की पार्टी होने का ग्रहण

अगड़ों और अमीरों की पार्टी होने का ग्रहण

वर्षों से भाजपा पर अगड़ों और अमीरों की पार्टी होने का ग्रहण लगता रहा। मोदी सरकार और भाजपा संगठन ने पिछले तीन वर्षों में इस मिथक को तोड़ते हुए हर गरीब के घर-घर में यह बात पहुंचाने का सफलतम प्रयास किया है कि मोदी सरकार और भाजपा संगठन गरीबों की पार्टी है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाली पार्टी है।

न नारा दिया, न वादा किया

न नारा दिया, न वादा किया

‘गरीबी हटाओ' जैसे नारे आजादी के बाद कांग्रेस देती रही, लेकिन गरीबी हटी नहीं। भाजपा ने न नारा दिया, न वादा किया। प्रधानमंत्री ने संसद की चौखट पर माथा टेकते हुए पहला वाक्य कहा कि यह सरकार गरीबों की सरकार है। और अपने पहले वाक्य को अभी तक जमीन पर साकार करने के लिए मोदी सरकार का हर फैसला साकार होता दिख रहा है।

 देश भ्रष्टाचार से त्रस्त

देश भ्रष्टाचार से त्रस्त

भारतीय समाज को पहली बार यह अहसास हो रहा है कि निर्वाचित सरकार हमारी है। सरकार की सफलता पहले पायदान पर उस समय समझ में आती है कि जब समाज यह कहने लगे कि जो हम सोच रहे हैं वही सरकार कर रही है। देश भ्रष्टाचार से त्रस्त था। घोटालों की गूंज से संसद गूंजती रहती थी। आम आदमी का जीवन भ्रष्टाचार के कारण त्रस्त हो गया था। तीन साल में कालेधन पर रोक, भ्रष्टाचार से मुक्ति और बेनामी संपत्ति पर अलीगढ़ का ताला लगाने का जो सफलतम प्रयास मोदी सरकार ने किया है वह हर जुबां पर है।

विमुद्रीकरण का ऐतिहासिक फैसला

विमुद्रीकरण का ऐतिहासिक फैसला

कालेधन से मुक्ति के लिए विमुद्रीकरण का ऐतिहासिक फैसला किया गया। विमुद्रीकरण की परीक्षा में नरेन्द्र मोदी जहां शत-प्रतिशत सफल हुए हैं, वहीं गरीबों ने अपनी आवाज से सरकार के साथ आवाज मिलाकर दो-टूक लोकतांत्रिक फैसला दिया कि विमुद्रीकरण पर मोदी सरकार के साथ हैं। इतना कठोर निर्णय! गरीब से गरीब को कठिनाई हुई, लेकिन सबके मन में एक खुशी थी कि कालाधन और भ्रष्टाचार रोकने का इससे बड़ा कोई उपाय नहीं है।

 तकदीर के खाते खोलने का काम

तकदीर के खाते खोलने का काम

विपक्षी पूछते हैं कि सरकार ने क्या किया? मैं उनको कहना चाहता हूं कि तीन साल में 49 करोड़ लोगों से अधिक को सीधा लाभ पहुंचाने और उनके सिर्फ बैंक खाते ही नहीं, बल्कि तकदीर के खाते खोलने का काम किया है। कुछ आंकड़े- जनधन-योजना के तहत 27.97 करोड़ खाते खोले गए। इन खातों में इन गरीबों ने स्वयं 63.835 करोड़ रुपए जमा किए। अब इन खातों में सरकारी योजनाओं की राशि जाने लगी। 13 करोड़ गरीबों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा में शामिल किया गया। स्टार्टअप एवं स्टैण्डअप योजना के तहत मुद्रा योजना के माध्यम से 6.6 करोड़ लोगों ने ऋण लिये और व्यापार शुरू किया। उज्ज्वला योजना के तहत समाज के अंतिम व्यक्ति जैसे 2 करोड़ लोगों को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन दिए गए। यह उज्ज्वला यही नहीं थमेगी, आनेवाले वर्षों में 5 करोड़ लोगों के घर की धुआं बंद करेगी।

तीन साल में, विपक्षी पूछते हैं

तीन साल में, विपक्षी पूछते हैं

क्या किया तीन साल में, विपक्षी पूछते हैं? राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बाद स्वच्छ भारत को अगर किसी ने जनांदोलन बनाया तो वह है नरेन्द्र मोदी की सरकार ने। स्वच्छता, समाज को स्वस्थता की ओर ले जा रही है। स्वच्छ भारत का अभिप्राय है स्वस्थ भारत। सामान्य सी बात लगती है, लेकिन उजाला एलईडी योजना, जिसके पीछे बिजली बचाओ अभियान है, इसके तहत 11 करोड़ 8 लाख एलईडी बल्ब वितरित किए गए।

आवासहीन लोगों के सपने को साकार करना

आवासहीन लोगों के सपने को साकार करना

प्रधानमंत्री आवास योजना को सफल करने के लिए बैंक के ब्याज दरों में कमी और 2022 तक 5 करोड़ आवासहीन लोगों के सपने को साकार करने की दिशा में जो कदम उठाया जा रहा है वह ऐतिहासिक कहा जाएगा। 12 हजार करोड़ की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना करोड़ों हाथों को हुनर देने के लिए स्वयं आगे आ रहा है।
मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए अनेक कार्य किए जा रहे हैं। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। किसान यदि सुरक्षित नहीं तो भारत सुरक्षित नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा राशि दुगुनी कर दी और किसानों के लिए प्रीमियम राशि को अब तक के दुगुने स्तर पर लाया गया। अब तक देश के 3 करोड़ 86 लाख किसानों ने इस योजना के तहत अपने को सुरक्षित किया है।

हर खेत को पानी

हर खेत को पानी

इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जिसके तहत ‘हर खेत को पानी' के लिए पिछले दो वर्षों से 12.7 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई की व्यवस्था की गई है। किसान की आय दुगुनी करने के लिए जबर्दस्त योजना बनाई गई है। ‘अच्छे दिन आएंगे' ये नारा नहीं है। अच्छे दिन आ रहे हैं। 31 मार्च 2014 को उपभोक्ता महंगाई दर 9.46 प्रतिशत थी जो 31 मार्च 2017 को तीन साल के अंदर घटकर 3.81 प्रतिशत हो गई है। ये आंकड़े भारत के हैं, भाजपा के नहीं। 31 मार्च 2014 को जीडीपी जो 6.7 प्रतिशत थी वह 31 मार्च 2017 को 7.10 प्रतिशत हो गई। 31 मार्च 2014 को औद्योगिक उत्पादन दर नकारात्मक -0.10 प्रतिशत थी जो 31 मार्च 2017 को 3 साल के अंदर बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है।

सड़कों का निर्माण

सड़कों का निर्माण

सड़कों की बात करें तो एक लाख 20 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कोई सामान्य बात नहीं है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2016-17 में 48,000 किमी सड़क निर्माण हुआ और हर रोज 133 किमी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। 2013-14 में रोजाना 69 किमी सड़क का ही निर्माण होता था।
इतना ही नहीं प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से निम्न और मध्यम वर्ग के शोषण का खात्मा हुआ। मोदी सरकार के 19 मंत्रालयों और विभागों की 92 योजनाआंे में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण लागू होने से 49,560 करोड़ की बचत हुई।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिले लाभों में 79 प्रतिशत महिलाएं हैं। सुकन्या समृद्धि योजना से 1 करोड़ खाते खोले गए और कुल 11,000 करोड़ रुपए जमा किए गए। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम अत्यंत सफल कार्यक्रम साबित हो रहा है। मोदी सरकार ने गरीब की रसोई को धुआं मुक्त कर दिया है और अब तक 2 करोड़ 20 लाख गरीब परिवार की माताएं-बहनें इसका लाभ ले रही हैं।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिले लाभों में 79 प्रतिशत महिलाएं हैं। सुकन्या समृद्धि योजना से 1 करोड़ खाते खोले गए और कुल 11,000 करोड़ रुपए जमा किए गए। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम अत्यंत सफल कार्यक्रम साबित हो रहा है। मोदी सरकार ने गरीब की रसोई को धुआं मुक्त कर दिया है और अब तक 2 करोड़ 20 लाख गरीब परिवार की माताएं-बहनें इसका लाभ ले रही हैं।

'मेक इन इंडिया'

'मेक इन इंडिया'

मोदी सरकार की प्राथमिकता है युवाओं का विकास और प्रोत्साहन। स्टार्टअप्स अभियान के माध्यम से युवाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे युवा अब केवल नौकरी नहीं मांग रहा है अपितु व्यवसाय कर वह रोजगार सृजन में भी जुट रहा है। सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है तथा 34 लाख से अधिक गैर-राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार की बाध्यता को समाप्त किया गया है। मोदी सरकार की अभिनव योजना ‘मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत ने उत्पादों की गुणवत्ता के मामले में चीन को सात स्थान पीछे धकेल दिया है।

‘वन रैंक, वन पेंशन’

‘वन रैंक, वन पेंशन’

मोदी सरकार सुरक्षा बलों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। रिटायर्ड सैनिकों के हित में सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चार दशकों से लंबित ‘वन रैंक, वन पेंशन' की मांग को पूरा किया। बांग्लादेश के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को मोदी सरकार ने सुलझाया। ‘मेक इन इंडिया' के तहत भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। भारतीय सेना ने पीओके में आतंकवादियों को उसके घर में घुसकर मारा और सर्जिकल स्ट्राइक से विश्व में देश की साख बढ़ी। इससे पहले म्यांमार में भी आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया।

 अप्रचलित कानूनों को निरस्त

अप्रचलित कानूनों को निरस्त

विधि के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए। 1100 से ज्यादा अप्रचलित कानूनों को निरस्त किया गया और ऐसे ही 400 अन्य कानूनों को निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देकर ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मोदी सरकार में संविधान, सीमा और सेना का गौरव बढ़ा है। दुनिया भर में भारत की साख और धाक बढ़ी है। प्रधानमंत्री के विदेश प्रवास से भारतवंशियों के बीच उत्साह जगा है। कैबिनेट के निर्णय और आंकड़ों पर जाएं तो शब्द और पन्ने कम पड़ जाएंगे।

सबसे बड़ी पार्टी आज भारतीय जनता पार्टी

सबसे बड़ी पार्टी आज भारतीय जनता पार्टी

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी आज भारतीय जनता पार्टी है। 17 राज्यों मंे एनडीए की सरकार है। इन राज्यों में 61 प्रतिशत आबादी रहती है, अर्थात् देश की दो तिहाई आबादी की सेवा एनडीए सरकार कर रही है। कांग्रेस शासित राज्य की आबादी मात्र 9 प्रतिशत रह गई। कांग्रेस की केवल 6 राज्यों में सरकार है। इन राज्यों में केवल 8.6 प्रतिशत आबादी रहती है।

283 लोकसभा सांसद

283 लोकसभा सांसद

भाजपा के 283 लोकसभा सांसद है। राज्य सभा में 56 सांसद हैं। एनडीए के 339 लोकसभा सांसद हैं और राज्यसभा में 74 सांसद हैं। 10 सदस्यों के साथ शुरू हुई भाजपा 12 करोड़ सदस्य के साथ आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। पूरे देश में भाजपा के 1,398 विधायक हैं। अजजा और अजा के सर्वाधिक सांसद भाजपा के हैं। सर्वाधिक महिला सांसद भाजपा के हैं। सर्वाधिक महापौर भाजपा के हैं। सर्वाधिक जिला पंचायत और पार्षद भाजपा के हैं। सर्वाधिक गांव के सरपंच भाजपा के हैं। आनेवाले दिनों में एनडीए राष्ट्र की पसंद का राष्ट्रपति चुनने वाला है।

नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी

विश्व के नामवर नेताओं में एक श्रेष्ठ नाम आता है नरेन्द्र मोदी का। अंग्रेजी में ग्लोबल और हिंदी में वैश्विक नेता का स्थान बनाने में उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। संगठन और साथ के समन्वय का इतिहास रचा जा रहा है। अनुकूलता के इस वर्चस्वशाली माहौल में देश की निगाहें भाजपा की ओर टिकी हुई हैं। कांग्रेस युग की समाप्ति का दौर चल रहा है। भाजपा युग के आगमन का दौर प्रारंभ हो चुका है। इस अनुकूल माहौल में हम सबका दायित्व बढ़ गया है। देश में अधिकारों की बजाय देश के लिए कर्तव्य करने का भाव पैदा हुआ है। तीन साल में भारतीय राजनीति ने अपनी खोई हुई साख को लौटाने की दिशा में एक नहीं, अनेक कदम उठाए हैं। मई 2014 के पहले रोज भ्रष्टाचार की चर्चा सदन में और सड़क पर होती थी, पर गत 3 वर्षों में न देश में, न संसद में, न सड़क पर मोदी सरकार में भ्रष्टाचार का आरोप न लगना यह दर्शाता है कि भारत भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र की श्रेणी की ओर अग्रसर हो रहा है। देश न प्रधानमंत्री का है, न भाजपा का। देश भारत के सवा सौ करोड़ आबादी का है और उसकी सेवा का जो सुनहरा मौका मिला है, उस दिशा में भाजपा और भाजपा सरकार का कदम सदैव उठते रहना चाहिए।

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