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उत्‍तराखंड: चीन बॉर्डर तक जाने वाली 3 सड़कें होंगी तैयार, 70 हेक्‍टेयर की फॉरेस्‍ट लैंड को मंजूरी

नई दिल्‍ली। उत्‍तराखंड सरकार की तरफ से चीन बॉर्डर तक जाने वाली तीन महत्‍वपूर्ण सड़कों के लिए गंगोत्री नेशनल पार्क में 70 हेक्‍टेयर की फॉरेस्‍ट लैंड की मंजूरी दे दी गई है। इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की तरफ से बताया गया है कि यह फैसला मंगलवार को 15वीं स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ एडवाइजरी बोर्ड मीटिंग में लिया गया है। इससे पहले खबरें आईं थी बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने राज्‍य में चीन बॉर्डर पर स्थि‍त आखिरी गांव तक जाने वाली सड़क पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।

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गंगोत्री नेशनल पार्क में हैं सड़कें

जिस सड़क निर्माण के लिए प्रस्‍ताव को राज्‍य सरकार ने मंजूरी दी है उसमें गरतंग गली रोड जो उत्‍तरकाशी जिले में आती है, वह भी शामिल है। यह भारत और तिब्‍बत के बीच एक बहुत पुरानी सड़क है। वानिकी मंत्री हरक सिंह रावत के हवाले से अखबार ने लिखा है कि ये सड़कें राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण हैं क्योंकि ये इंडो-तिब्‍बत बॉर्डर पुलिस के बेस कैंप को जोड़ती है। यह कैंप उत्‍तरकाशी जिले में चीन बॉर्डर के करीब है। उन्‍होंने बताया कि राष्‍ट्रीय सुरक्षा की दिशा में उठाया गया यह एक बड़ा कदम है। तीन सड़कों के निर्माण से जुड़े प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई है। ये सड़कें गंगोत्री नेशनल पार्क से गुजरेंगी जिसमें 11.85 किलोमीटर वाली सुमला से थांगला तक जाने वाली सड़क शामिल है। इस सड़क के लिए 30.39 हेक्‍टेयर फॉरेस्‍ट लैंड की मंजूरी दी गई है। दूसरी सड़क 6.21 किलोमीटर लंबी है और यह त्रिपानी से रंगमछागार तक है। इस सड़क के लिए 11.218 हेक्‍टेयर जमीन की मंजूरी दी गई है।

62 की जंग में सड़क न होने का भुगता खामियाजा

तीसरी सड़क 17.60 किलोमीटर लंबी है और यह मंडी से संगचोकला तक है। इस सड़क के लिए 31.76 हेक्‍टेयर की जमीन की मंजूरी दी गई है। इन प्रस्‍तावों को अब अंतिम मंजूरी के लिए वाइल्‍ड लाइफ के लिए बने नेशनल बोर्ड को भेजा जाएगा। मंत्री रावत ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण के लिए पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। साथ ही बताया कि सन् 1962 की जंग में यहां पर बॉर्डर के इलाकों तक कोई सड़क नहीं थी और चीन को उसका फायदा हुआ था। वहीं एनबी शर्मा जो कि गंगोत्री नेशनल पार्क के डिप्‍टी डायरेक्‍टर हैं, उन्‍होंने बताया कि ये सड़कें चीन सीमा के करीब स्थित इस पार्क का आंतरिक हिस्‍सा हैं। अभी तक सुमला, त्रिपानी और मंडी तक आईटीबीपी के जवानों को बॉर्डर के इलाकों तक जाने के लिए पैदल चलना पड़ता है। जिस जगह पर सड़क का निर्माण होगा वह समुद्र तल से 15,000 फीट की ऊंचाई पर है। यह जमीन पूरी तरह से बंजर है और यहां कोई पेड़ नही है। एनबी शर्मा ने बताया कि सिर्फ कुछ घास ही इन हिस्‍सों में उगती है और पेड़ न के बराबर हैं। ऐसे में पेड़ों को भी काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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