Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

रवींद्र सिंह दहिया: कारगिल युद्ध में शहीद होने वाला सबसे कम उम्र का जवान, आखिरी खत में लिखी बात सच साबित हुई

25 Years of Kargil war: इंडिया इस साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। दुनिया से सबसे दुर्गम क्षेत्र में 84 दिनों तक चले इस युद्ध सैकड़ों वीर जवान शहीद हुए। कारगिल युद्ध की जीत और सैनिकों के शौर्य की एक से बढ़कर एक गाथाएं भरी पड़ी हैं।

इसी कारगिल के युद्ध में ऐसा ही एक भारत मां की वीर सपूत था। जो मात्र 19 साल की उम्र में देश पर कुर्बान हो गया। कारगिल में अपना सर्वोत्तम बलिदान देने वाले इस बहादुर जवान का नाम है रवींद्र सिंह दहिया। जब वह शहीद हुए तब वे सिर्फ 19 साल के थे। कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले सबसे कम उम्र के भारत मां के लाल थे।

25 Years of Kargil Ravindra Singh Dahiya Youngest soldier to be martyred in Kargil war

हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव में जन्मे सिपाही रविंद्र सिंह दहिया का जन्म 20 मई 1980 को हुआ था। रविंद्र ऐसे गांव से संबंध रखते थे, जहां के लोग मानों भारतीय सेना के लिए ही बने हों। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक सभी युद्धों में गांव के वीर सपूतों ने हिस्सा लिया है। बचपन में गांव के इस माहौल में पले-बढ़े रविंद्र के मन में देश को लेकर पहले ही जज्बा भरा हुआ था।

बचपन के शौक ने बनाया सेना का जवान

12वीं पास करने के बाद 28 अगस्त, 1997 को भारतीय सेना की 4 जाट रेजिमेंट में भर्ती हो गये। रविंद्र के घरवाले बताते हैं कि, रविंद्र को बंदूक चलाने का शौक बचपन से ही था। उनके इसी शौक ने उन्हें सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान राइफल फायरिंग में पहला स्थान हासिल किया था। जिसके लिए उन्हें गोल्ड मेडल से नवाजा गया।

ट्रेनिंग खत्म होने के बाद रविंद्र की पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई। सेना की 4 जाट रेजिमेंट वह पहली ब्रिगेड थी, जो कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों से सबसे पहले टकराई थी। रविंद्र भी इसी टुकड़ी का हिस्सा थे। 6 जून 1999 को काक्सर हिल्स में हुई लड़ाई में रविंद्र को सीने पर गोली और वह देश के लिए शहीद हो गए। इस युद्ध में वह सबसे कम उम्र के शहीद होने वाले वीर जवान थे।

रविंद्र की आखिरी चिट्ठी

रविंद्र ने शहादत के कुछ दिनों पहले अपनी मां को एक चिट्ठी भेजी थी। जो उनके जीवन का अंतिम खत साबित हुआ। रविंद्र ने खत में लिखा था कि, मां अभी रिश्ता मत लेना। मुझे अभी देश के लिए बहुत काम करना है। शायद रविंद्र को पता था कि, वह जिस युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं, वहां उन्हें देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करनी पड़ सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रविंद्र के गांव से मौजूदा समय में 200 से ज्यादा जवान फौज में अलग-अलग जगह और बड़ी पोस्टों पर भी देश की सेवा कर रहे हैं। उनके गांव के लोग प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल तक देश के लिए कु्र्बान हुए हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+