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अमरनाथ हादसा: मां को बचाने की कोशिश में 22 वर्षीय बेटी की गई जान, पूरी कहानी पढ़ भीग जाएंगी आंखें

अमरनाथ यात्रा के दौरान बादल फटने से अब तक 16 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। इस हादसे में पश्चिम बंगाल की एक छात्रा की भी जान चली गई। छात्रा की जान अपनी मां को बचाने की कोशिश में गई।

श्रीनगर, 11 जुलाई : अमरनाथ यात्रा के दौरान बादल फटने से अब तक 16 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। इस हादसे में पश्चिम बंगाल की एक छात्रा की भी जान चली गई। छात्रा की जान अपनी मां को बचाने की कोशिश में गई। बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में उसकी मां फंस गई थी, उन्हें बचाने की कोशिश में छात्रा बह गई। अंतिम संस्कार के लिए उनका शव अब कोलकाता लाया गया है। छात्रा की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है।

रविवार को बरामद हुआ शव

रविवार को बरामद हुआ शव

हादसे के दो दिनों तक छात्रा का पता नहीं चला। बचाव अभियान में कर्मियों ने काफी मशक्कत की, पर कुछ पता नहीं चल सका। रविवार शाम को छात्रा का शव बरामद हुआ। इसके बाद उसके माता-पिता होश खो बैठे। 22 वर्षीय छात्रा वर्षा मुहुरी पीएचडी की तैयारी कर रही थीं। उन्हें ट्रेवलिंग करना बहुत पसंद था।

मां और मामा के साथ गई थी अमरनाथ

मां और मामा के साथ गई थी अमरनाथ

वर्षा को कोलकाता के पास बरूईपुर की रहने वाली थीं। मुहुरी अपनी मां निबेदिता और मामा सुब्रत चौधरी एक जुलाई को कोलकाता से रवाना हुई थई। 5 जुलाई को अमरनाथ मंदिर के रास्ते पहलगाम पहुंची थी। वे 16 जुलाई को घर वापस आने वाली थी। पर उसे क्या पता कि ये उसका अंतिम सफर होगा।

परिजनों में मची चीखपुकार

परिजनों में मची चीखपुकार

मृतका के एक रिश्तेदार स्वरूप मुहुरी ने कहा कि वर्षा ने बाढ़ आने पर अपनी मां को बह जाने से बचाने की कोशिश की। इस दौरान उसकी मां निबेदिता बच गई, लेकिन खुद वर्षा बह गई और लापता हो गई। उसका शव रविवार को मिला। इसके बाद लोगों में चीख पुकार मच गई।

परिवार को यात्रा करना पसंद था

परिवार को यात्रा करना पसंद था

वर्षा के पड़ोसी शांतनु रॉय ने कहा कि परिवार को यात्रा करना पसंद था और साल में कम से कम दो से तीन बार पर्यटन स्थलों की यात्रा करते थे। मैं उनके साथ एक बार भूटान गया था। इसी उद्देश्य से वह अपनी मां और मामा के साथ अमरनाथ यात्रा पर गई थी, लेकिन हादसे में वर्षा की जान चली गई।

अब तक 40 लोग लापता

अब तक 40 लोग लापता

बता दें कि बाढ़ और भूस्खलन के बाद 40 लोग लापता हो गए। बचाव कर्मी पूरी ताकत से उन्हें खोज रहे थे। लापता तीर्थयात्रियों के मिलने की उम्मीद रविवार को खत्म सी हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद भी लापता लोगों का कुछ पता नहीं चल सका। हालांकि, बचावकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी कोशिश जारी रखी।

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