SC Decision in 2024: नए साल में आने वाले वो 10 बड़े फैसले, जो बदल सकते हैं सामाजिक-राजनीतिक ताना-बाना
Supreme Court 10 Big Decision in 2024: नए साल में सुप्रीम कोर्ट से कुछ ऐसे फैसले आने की संभावना है, जिससे देश के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने में बड़ा बदलाव आ सकता है।
यहां हम उन मामलों की बात कर रहे हैं, जो देश के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं और फिलहाल देश की सर्वोच्च अदालत में या तो लंबित पड़े हैं या फिर सुनवाई पूरी हो चुकी है और सिर्फ फैसला आने का इंतजार है।

1) राजनीतिक दलो के 'मुफ्त के वादे' (फ्रीबीज या चुनावी रेवड़ी)
नए साल में देश में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले 'मुफ्त के वादे' (फ्रीबीज या चुनावी रेवड़ी) पर विचार करना है। इसके खिलाफ बीजेपी से जुड़े नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर कर रखी है।
याचिका में कहा गया है कि 'मुफ्त के वादे' से करदाताओं पर फिजूल की मार पड़ती है। याचिका में ऐसे वादे करने वाले राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने की मांग की गई है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट में इसपर सुनवाई होनी है।
2) इलेक्टोरल बांड
राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बांड के माध्यम से मिलने वाले चंदे के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई है और 5 जजों की संविधान पीठ ने इसपर फैसला सुरक्षित रखा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से इसमें पारदर्शिता की कमी का हवाला दिया गया है।
3) दागी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध
यह मामला भी देश की राजनीतिक-व्यवस्था से संबंधित है। 9 नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों में दागी सांसदों और विधायकों पर निर्णय सुनाते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। तब सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि वह दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने पर विचार करेगा। नए साल में इसपर भी सुनवाई संभव है।
4) ज्ञानवापी विवाद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर, 2023 को वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के स्वामित्व से जुड़े मुद्दे पर हिंदू पक्ष के मामले को निचली अदालत में सुनवाई के लिए हरी झंडी देते हुए मुस्लिम पक्ष की पांच याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनवरी में सुनवाई संभव है। मंदिर पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है।
5) राज्यपाल की शक्तियां
सुप्रीम कोर्ट में कई राज्यों की ओर से विधानसभाओं से पारित बिलों को राज्यपालों के लटकाए रखने का मामला भी लंबित है। इन मामलों में राज्यपाल की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। जनवरी में भी इसपर सुनवाई की जानी है।
6) प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शक्तियां
27 जुलाई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के अधिकारों के संबंध में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर वह 2024 में फैसला सुना सकता है। अपने फैसले में सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त करने के साथ-साथ तलाशी लेने का भी अधिकार है।
7) प्रशासनिक अधिकारियों पर दिल्ली सरकार के अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने नया कानून बनाया है, जो संसद से पास हो चुका है। नए कानून के तहत दिल्ली के अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार केंद्र के पास रहेगा। दिल्ली सरकार ने इसे चुनौती दी है, जिसपर सुप्रीम कोर्ट नए साल में सुनवाई करेगा।
8) अविवाहित युवती को सरोगेसी का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका देकर अविवाहित युवतियों को भी सरोगेसी का हक देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने इस मामले पर केंद्र से जवाब मांगा था। इस मामले पर 2024 में सुनवाई होनी है।
9) महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता
2024 में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर सुनवाई कर सकती है। इन मामलों में केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति के फैसले का परीक्षण, दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाओं में खतना की कुप्रथा, मस्जिदों में महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकार, पारसी महिलाओं को संपत्ति का अधिकार जैसे मामले शामिल हैं।
10) CAA की धारा 6ए की संवैधानिकता
सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संविधान पीठ ने 12 दिसंबर, 2023 को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 17 याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट इस पर नए साल में फैसला सुनाएगा।












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